अब सेंसर से होगी फसलों की निगरानी

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अब सेंसर से होगी फसलों की निगरानी


-उद्यान व वानिकी महाविद्यालय ने शुरू की सेंसर फसल तकनीक

पूर्वी चंपारण,20 मई (हि.स.)। अब सेंसर से फसलों की निगरानी होगी। डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित पंडित दीनदयाल उपाध्याय उद्यान एवं वानिकी महाविद्यालय पीपराकोठी के इंस्ट्रक्शनल फार्म में आधुनिक कृषि एवं उद्यानिकी तकनीकों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अत्याधुनिक इंटीग्रेटेड वेदर कम सॉयल सेंसर यूनिट स्थापित की गई है। यह यूनिट तापमान, वायुमंडलीय आर्द्रता, वर्षा, वायु दाब, पवन गति, मिट्टी की नमी, मिट्टी का तापमान तथा विभिन्न रोगों के पूर्वानुमान जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां रियल टाइम में उपलब्ध कराएगी। इससे वैज्ञानिक फसल प्रबंधन एवं प्रिसिजन फार्मिंग को बढ़ावा मिलेगा। महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. कुंदन किशोर ने बताया कि जलवायु परिवर्तन और अनिश्चित मौसम की परिस्थितियों को देखते हुए कृषि एवं उद्यानिकी में आधुनिक तकनीकों का उपयोग समय की आवश्यकता बन गया है।

उन्होंने कहा कि यह यूनिट विद्यार्थियों को आधुनिक कृषि तकनीकों का व्यवहारिक और तकनीकी ज्ञान देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इसके माध्यम से छात्र मौसम आधारित कृषि प्रबंधन, रोग पूर्वानुमान, सिंचाई निर्धारण, फसल स्वास्थ्य निगरानी तथा स्मार्ट फार्मिंग तकनीकों को प्रत्यक्ष रूप से समझ सकेंगे। यह यूनिट मोबाइल तकनीक से भी जुड़ी हुई है, जिसके जरिए सभी आवश्यक जानकारियां सीधे मोबाइल फोन पर प्राप्त की जा सकती हैं। किसान और शोधकर्ता कहीं से भी अपने मोबाइल पर खेत की वास्तविक स्थिति देख सकेंगे। इसके आधार पर आवश्यकता अनुसार सिंचाई, उर्वरक एवं कीटनाशी या फफूंदनाशी दवाओं के प्रयोग को लेकर त्वरित और सटीक निर्णय लिया जा सकेगा। इससे समय, श्रम और संसाधनों की बचत होगी तथा फसल प्रबंधन अधिक प्रभावी और वैज्ञानिक बनेगा। फल, सब्जी और पुष्प फसलों में मौसम आधारित प्रबंधन अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि तापमान, आर्द्रता और मिट्टी की नमी में होने वाले परिवर्तन सीधे फसल की वृद्धि, गुणवत्ता और उत्पादन को प्रभावित करते हैं। ऐसे में यह सेंसर यूनिट समय रहते आवश्यक सूचनाएँ उपलब्ध कराकर फसलों को प्रतिकूल परिस्थितियों से बचाने में सहायक सिद्ध होगी।

वहीं, डॉ. आर. बी. शर्मा ने कहा कि यह पहल किसानों और विद्यार्थियों दोनों के लिए काफी उपयोगी साबित होगी। मौसम आधारित आंकड़ों के माध्यम से पौधों में रोगों की संभावित स्थिति का पूर्वानुमान लगाकर समय पर उचित प्रबंधन उपाय अपनाए जा सकेंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / आनंद कुमार

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