इंडोनेशिया के शिविर में पहुंचे रोहिंग्या शरणार्थी

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कोलकाता। कुल 81 रोहिंग्या शरणार्थी, जिनकी नाव 5 जून को इंडोनेशिया के पूर्वी आचेह तट पर सुरक्षित रूप से पहुंच गई थी, को एक शरणार्थी आवास केंद्र में ले जाया गया है।

जकार्ता में यूएनएचसीआर के प्रवक्ता द्वि प्रफित्रिया ने आईएएनएस को ईमेल के माध्यम से बताया कि रोहिंग्या शरणार्थियों को शुरू में पुलाऊ इदामान में शरण दी गई थी और वे बुधवार तक वहीं रहे।

प्रफित्रिया ने कहा, स्थानीय अधिकारियों द्वारा प्रारंभिक प्रतिक्रिया के रूप में उन्हें भोजन और चिकित्सा सहायता प्रदान की गई थी। यूएनएचसीआर की टीम शनिवार (5 जून) से मौजूद है और प्रतिक्रिया का समन्वय कर रही थी।

उन्होंने कहा, सभी शरणार्थियों को कुपोषण का इलाज करने और विटामिन की कमी से होने वाली गंभीर बीमारी बेरीबेरी को रोकने के लिए विटामिन बी वितरित किया गया है। उन्हें कई मानवीय संगठनों से भोजन, पीने का पानी और स्वास्थ्य सहायता भी मिली है।

सभी रोहिंग्या शरणार्थी की कोविड-19 रिपोर्ट निगेटिव आई है और उन्हें कोविड के टीके की पहली खुराक मिल चुकी है। टीकाकरण शिविर का आयोजन पूर्वी आचेह सरकार द्वारा किया गया है और इसमें यूएनएचसीआर और आईओएम द्वारा सहायता प्रदान की गई है।

81 रोहिंग्या शरणार्थी एक नौका पर 11 फरवरी को 90 व्यक्तियों के एक समूह के साथ बांग्लादेश से निकले थे। एक सप्ताह के भीतर, उनकी नौका में तकनीकी खराबी आ गई, जिसके बाद उन्हें अंडमान द्वीप समूह पर भारतीय तट रक्षकों द्वारा बचाया गया।

अंडमान द्वीप समूह पर भारतीय तट रक्षकों द्वारा उन्हें खाना खिलाया गया और उनकी देखभाल की गई थी। यही नहीं, उनकी नौका को ठीक करने में भी भारतीय तट रक्षकों ने मदद की थी। बांग्लादेश से निकलने के बाद नौ शरणार्थियों की समुद्र का पानी पीने और कुपोषण के कारण मृत्यु हो गई थी।

जब बांग्लादेश ने उन्हें लेने से इनकार कर दिया, तो भारतीय तट रक्षकों ने उनकी नौका को ठीक करके उन्हें दक्षिण पूर्व एशिया की ओर बढ़ने में सहायता की।

--आईएएनएस

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