सावन में क्यों जाएं पुडुचेरी के वेदपुरीश्वरर मंदिर? जानें इस प्राचीन शिव धाम का धार्मिक महत्व


 
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दक्षिण भारत के केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में कई ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल मौजूद हैं, लेकिन यहां स्थित वेदपुरीश्वरर मंदिर का अपना एक विशेष आध्यात्मिक महत्व है। सावन के पवित्र महीने में भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए श्रद्धालु दूर-दूर से यहां पहुंचते हैं। यदि आप भी इस सावन किसी ऐतिहासिक और शांतिपूर्ण शिव धाम के दर्शन की योजना बना रहे हैं, तो पुडुचेरी का यह प्राचीन मंदिर आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकता है। जानते हैं इसके बारे में...

वेदपुरीश्वरर मंदिर का इतिहास और धार्मिक महत्व

श्री वरदराजा पेरुमल मंदिर के पास स्थित यह धाम शहर के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। बता दें कि ईश्वरन धर्मराजा कोविल के नाम से प्रसिद्ध यह मंदिर मुख्य रूप से महादेव को समर्पित है। यहां भगवान शिव को 'वेदपुरीश्वरर' और माता पार्वती को 'त्रिपुरासुंदरी' के रूप में पूजा जाता है।

यह मंदिर 230 साल से भी अधिक पुराना है। इतिहास के अनुसार, वर्ष 1748 में गवर्नर डुप्लेक्स के शासनकाल के दौरान मूल मंदिर को नष्ट कर दिया गया था। इसके बाद 1788 में दीवान कंदप्पा मुदलियार ने जनता के सहयोग से इसका पुनर्निर्माण कराया। माना जाता है कि यहां स्थापित शिवलिंग को लगभग 100 साल पहले सांबा ईश्वरन स्ट्रीट से लाया गया था।

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अनोखी वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण

वेदपुरीश्वरर मंदिर को पारंपरिक द्रविड़ शैली में बनाया गया है। मंदिर का पूरा परिसर ग्रेनाइट की मजबूत दीवारों से घिरा हुआ है। बता दें कि मंदिर का प्रवेश द्वार यानी राजगोपुरम 75 फीट ऊंचा है, जो पांच मंजिला बना हुआ है। मुख्य गर्भगृह में पवित्र शिवलिंग स्थापित है। मुख्य द्वार से गर्भगृह तक पहुंचने के लिए ध्वजस्तंभ हॉल, महामंडप और अर्थमंडप बने हुए हैं। मंदिर परिसर में एक पवित्र कुंड है। इसके अलावा यहां भगवान गणेश, कार्तिकेय, माता त्रिपुरासुंदरी, शनिदेव, मां दुर्गा, चंडिकेश्वर, दक्षिणामूर्ति और नवग्रहों के अलग-अलग छोटे मंदिर बने हुए हैं।

प्रमुख त्यौहार और आयोजन

वैसे तो यहां पूरे साल श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन कुछ विशेष मौकों पर मंदिर की रौनक देखते ही बनती है।

वैकासी ब्रह्मोत्सवम: तमिल महीने वैकासी (मई-जून) के दौरान यहां बड़ा ब्रह्मोत्सव मनाया जाता है।
अन्नाभिषेकम: आईपसी महीने (अक्टूबर-नवंबर) में भगवान शिव का विशेष अन्नाभिषेक किया जाता है।
महाशिवरात्रि: मासी महीने (फरवरी-मार्च) और सावन के महीने में यहां विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन होता है।

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कैसे पहुंचें?

पुडुचेरी बस स्टैंड से ऑटो या कैब के जरिए यहां 15 से 30 मिनट में आसानी से पहुंचा जा सकता है। मंदिर सुबह 6:00 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक और शाम को 4:30 बजे से रात 8:30 बजे तक खुला रहता है। मंदिर में प्रवेश और दर्शन पूरी तरह से निःशुल्क है।

निष्कर्ष

सावन के महीने में आध्यात्मिक शांति और इतिहास का अनूठा संगम देखना चाहते हैं, तो वेदपुरीश्वरर मंदिर जरूर जाएं। द्रविड़ स्थापत्य कला की सुंदरता और भगवान शिव का दिव्य आशीर्वाद आपकी इस यात्रा को यादगार बना देगा।

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