काशी का यह दुर्गा पंडाल है बेहद खास, 259 साल से विराजमान हैं मां की मूर्ति, आज तक नहीं हुआ विसर्जन
देवी मां के नौ रूपों की आराधना का पर्व नवरात्रि इन दिनों पूरे देश में धूमधाम से मनाया जा रहा है। शास्त्रों और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माँ दुर्गा की महिमा असीम है, दुर्गा पूजा मां की भक्ति और शक्ति को सेलिब्रेट करता एक पावन उत्सव है। दुर्गा पूजा में मां दुर्गा की बड़ी-बड़ी प्रतिमाओं (मूर्तियों) की स्थापना और उनके विसर्जन की परंपरा बहुत प्राचीन और भव्य है। नवरात्रि में मां का स्वागत किया जाता है और दशमी के दिन पूरे सम्मान से मां दुर्गा को उनके दिव्य धाम के लिए विदा किया जाता है, लेकिन क्या आपको पता है कि महाकाल की नगरी काशी में के मदनपुरा इलाके में पुराना दुर्गा बाड़ी स्थित है, जहां मां दुर्गा की एक ऐसी प्रतिमा है जिसका 259 सालों से विसर्जन नहीं हुआ है और भक्त हर साल इसकी पूरी श्रद्धा और भक्ति से उपासना करते हैं। चलिए आपको इसके बारे में बताते हैं।
259 साल पुरानी मां दुर्गा की मूर्ति की दिव्य कहानी
वाराणसी के मदनपुरा इलाके में पुराना दुर्गा बाड़ी में मौजूद इस मूर्ति की कहानी काफी चमत्कारी है और इसका इतिहास सैकड़ों साल पुराना है। साल 1767 में मदनपुरा क्षेत्र में रहने वाले मुखर्जी परिवार ने बहुत प्रेम से मां का स्वागत किया था और पूरे भक्ति भाव से उनकी सेवा की। दशमी के दिन मुखर्जी परिवार मां को पूरे सम्मान के साथ विदाई देने की तैयारी कर रहा था, लेकिन तभी कुछ ऐसा हुआ जिसने सभी को हैरान कर दिया और मां के इस चमत्कार से सभी चकित रह गए।

नहीं हो सकी थी देवी की विदाई
बताया जाता है कि जब दशमी के दिन मां की मूर्ति के विसर्जन का वक्त आया, तो 5 फीट की छोटी सी प्रतिमा को सैकड़ों लोग मिलकर भी नहीं उठा पाए और सभी हैरान व परेशान हो गए। मन में यह विचार था कि मां क्रोधित तो नहीं है या फिर इस चमत्कार के पीछे क्या वजह है? इसके बाद देवी ने परिवार के मुखिया को सपने में दर्शन दिए और कहा कि वह उनकी भक्ति-आराधना से बहुत प्रसन्न हैं व अब वह वहीं विराजमान हैं। यह मूर्ति मिट्टी और पुआल से बनी है, लेकिन इसकी चमक आज भी वैसी ही बनी हुई है।
मुरादें पूरी करती हैं मां
काशी के लोग और वहां प्रचलित कथाएं बताती हैं कि काशी में विराजमान देवी की यह मूर्ति काफी चमत्कारिक है और वहां सच्चे मन से मांगी गई सारी मुरादें पूरी होती हैं। अगर कोई भक्त मन में कोई इच्छा लेकर वहां पहुंचता है, तो वह इच्छा जरूर पूरी होती है। यूं तो वहां पूरे साल मां का पूजन किया जाता है, लेकिन खासकर नवरात्रि के नौ दिन देवी की विशेष पूजा होती है।

