मध्य प्रदेश में मौजूद है दो रूठी बहनों का मंदिर, जानें दिलचस्प कहानी
मध्य प्रदेश में ऐसे कई मंदिर हैं, जिनकी अपनी अलग ही मान्यता हैं, लेकिन एमपी के देवास शहर में एक ऐसा अनोखा मंदिर है, जिसकी कहानी सुनकर आप भी हैरान हो जाएंगे। यह मंदिर किसी आम देवी का नहीं, बल्कि दो रूठी हुई सगी बहनों का है।भारत देश का दिल कहा जाने वाला राज्य मध्यप्रदेश अपनी खूबसूरती और इतिहास के लिए जाना जाता है। यहां ऐसे कई अनोखे मंदिर हैं, जहां की अपनी अलग ही मान्यताएं हैं। वैसे तो मध्य प्रदेश में दो ज्योतिर्लिंग भी है, लेकिन आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताएंगे, जहां दो रूठी हुई बहनें विराजमान हैं। प्यार से लोग इन दोनों बहनों को मां तुलजा भवानी और मां चामुंडा के नाम से बुलाते हैं। आइए जानते हैं इन दोनों बहनों की कहानी और इस मंदिर के बारे में।
यहां है दो रूठी बहनों का मंदिर
मध्य प्रदेश के उज्जैन के पास मौजूद देवास शहर में एक बहुत ऊंची टेकरी है, जहां पर मां तुलजा भवानी और मां चामुंडा विराजमान है। यह 52 शक्तिपीठों में से एक शक्तिपीठ मानी जाती है। जानकारी के मुताबिक यहां माता सती का रक्त यानी खून गिरा था, तभी से यह जगह रक्तपीठ के नाम से भी जाने लगी हैं। वैसे तो हमेशा यहां भक्तों की भीड़ रहती हैं, लेकिन नवरात्रि के दौरान यहां श्रद्धालुओं का जमावड़ा लग जाता है। चलिए अब बात करते हैं दोनों रूठी हुई बहनों की कहानी के बारे में।

दोनों बहनों के बीच हुआ था विवाद
जानकारी के मुताबिक बड़ी माता मां तुलजा भवानी और छोटी माता मां चामुंडा दोनों सगी बहनें थी। दोनों बहनों के बीच एक दिन किसी बात को लेकर झगड़ा हो गया। यह झगड़ा इतना बढ़ गया कि दोनों ने फैसला ले लिया की वे अब एक दूसरे से दूर चली जाएंगी। कहा जाता है की बड़ी माता यानी तुलजा भवानी गुस्से में पाताल की ओर जानें लगी और छोटी माता यानी चामुंडा देवी पहाड़ों से नीचे की तरफ जाने लगी।

हनुमान जी और भैरव बाबा ने की थी रुकने की विनती
दोनों के गुस्से को देखकर हनुमान जी और भैरव बाबा ने उन्हें वही रुक जाने के लिए प्रार्थना की। बड़ी माता तब तक आधी पाताल में समा चुकी थी और छोटी माता काफी नीचे उतर चुकी थी। यही वजह है, की बड़ी माता का आधा शरीर नीचे की तरफ धसा हुआ है और छोटी माता बड़ी माता से थोड़ी दुरी पर टेकरी के नीचे की ओर विराजमान हैं।

ऐसे पहुंचें इस मंदिर तक
आप इस मंदिर के दर्शन करने के लिए परिवार वालों के साथ जा सकती हैं या दोस्तों के साथ भी आप दर्शन का प्लान कर सकती हैं। यहां पहुंचने के लिए आप अपने घर के नजदीकी रेलवे स्टेशन से इंदौर जंक्शन, देवास जंक्शन या उज्जैन जंक्शन तक की ट्रेन बुक कर सकती हैं।
इसके बाद आप उज्जैन और इंदौर से बस कर देवास शहर तक आ सकती हैं। देवास बस स्टैंड से आपको शेयरिंग टैक्सी, लोकल टेंपो और पर्सनल कैब भी मिल जाएगी। दर्शन के लिए आप अगर टेकरी जा रही हैं, तो वहां आपको सीढ़ी के जरिए जाना होगा या आप रोपवे का भी इस्तेमाल कर सकती हैं।

