Sun Temples India: भारत में कहां-कहां विराजते हैं सूर्यदेव? हर मंदिर की है अपनी अनोखी मान्यता

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मकर संक्रांति का पर्व सूर्यदेव की उपासना से जुड़ा हुआ है. इसी दिन सूर्य उत्तरायण होते हैं और माना जाता है कि देवताओं का दिन आरंभ होता है. सूर्यदेव को ऊर्जा, स्वास्थ्य, तेज और जीवन का आधार माना गया है. देशभर में सूर्यदेव के कई प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर हैं, जिनकी अपनी-अपनी मान्यताएं और कथाएं हैं. मकर संक्रांति के पावन अवसर पर आइए जानते हैं भारत के प्रमुख सूर्य मंदिरों और उनसे जुड़ी आस्था के बारे में.

कोणार्क का सूर्य मंदिर | जानकारी, विवरण, मानचित्र, और तथ्य | ब्रिटानिका

कोणार्क सूर्य मंदिर (ओडिशा)
ओडिशा के पुरी जिले में स्थित कोणार्क मंदिर वास्तुकला का एक अद्भुत चमत्कार है. इसे 13वीं शताब्दी में राजा नरसिंहदेव प्रथम ने बनवाया था.

अनोखी मान्यता: इस मंदिर को एक विशाल रथ के रूप में बनाया गया है, जिसमें 12 जोड़ी पत्थर के पहिये हैं और इसे सात घोड़े खींच रहे हैं. ये 12 पहिये साल के 12 महीनों के प्रतीक हैं.

खास बात: मंदिर के पहियों की बनावट ऐसी है कि उनकी छाया देखकर आप समय का बिल्कुल सही अंदाजा लगा सकते हैं. इसे भारत का काला शिवालय भी कहा जाता है.

मोढेरा सूर्य मंदिर गुजरात: इतिहास + वास्तुकला + यात्रा सुझाव जो आपको पसंद  आएंगे

मोढेरा सूर्य मंदिर (गुजरात)
गुजरात के मेहसाणा जिले में स्थित यह मंदिर सोलंकी वंश के राजा भीमदेव प्रथम ने बनवाया था. यह मंदिर अपनी बेजोड़ नक्काशी के लिए जाना जाता है.

अनोखी मान्यता: इस मंदिर का निर्माण इस तरह किया गया था कि विषुव के दिनों में सूर्य की पहली किरण सीधे मंदिर के गर्भगृह में पड़ती थी.

खास बात: मंदिर के सामने एक विशाल जलाशय है जिसे सूर्य कुंड कहा जाता है. इसके चारों ओर 108 छोटे-छोटे मंदिर बने हुए हैं, जो देखने में बेहद सुंदर लगते हैं.

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मार्तंड सूर्य मंदिर (जम्मू-कश्मीर)
कश्मीर के अनंतनाग में स्थित यह मंदिर अब खंडहर के रूप में है, लेकिन आज भी इसकी भव्यता देखते ही बनती है. इसे 8वीं शताब्दी में राजा ललितादित्य मुक्तपीड ने बनवाया था.

अनोखी मान्यता: पहाड़ों के बीच स्थित यह मंदिर कभी अपनी ऊंचाई और शानदार वास्तुकला के लिए मशहूर था. इसे भारत के सबसे पुराने सूर्य मंदिरों में से एक माना जाता है.

खास बात: आक्रमणों के कारण अब यहां केवल अवशेष बचे हैं, लेकिन फिर भी भक्त यहाँ सूर्य देव के तेज का अनुभव करने खिंचे चले आते हैं.

कटारमल सूर्य मन्दिर - विकिपीडिया

कटारमल सूर्य मंदिर (उत्तराखंड)

अल्मोड़ा जिले में स्थित यह मंदिर अपनी ऊंचाई और प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है. इसे बड़ादित्य मंदिर भी कहा जाता है.

अनोखी मान्यता: माना जाता है कि इसे कत्यूरी राजा कटारमल ने बनवाया था. यह कोणार्क के बाद देश का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण सूर्य मंदिर माना जाता है.

खास बात: यह मंदिर समुद्र तल से करीब 2100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. यहाँ की पत्थर की नक्काशी और प्राचीन मूर्तियां भक्तों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं.

सूर्य नारायण मंदिर आंध्र प्रदेश (Surya Narayana Temple Andhra)

अरावली सूर्य मंदिर (आंध्र प्रदेश)
इसे अरसावल्ली सूर्य मंदिर भी कहते हैं. यह आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम में स्थित है और यहां सूर्य देव को पद्मपाणि के रूप में पूजा जाता है.

अनोखी मान्यता: कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण स्वयं भगवान इंद्र ने करवाया था.

खास बात: साल में दो बार ऐसा समय आता है जब सूर्य की किरणें सीधे भगवान सूर्य के चरणों को छूती हैं.

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