Sawan 2026: कुतुब मीनार से ऊंचा है काशी का ये मंदिर, हिमालय के संत ने किया था शिलान्यास
काशी को मंदिरों को शहर कहा जाता है। इसी काशी में हजारों मंदिर हैं, जिनका अपना ऐतिहासिक और धार्मिक महत्त्व है। मंदिरों के इस शहर में देश का सबसे ऊंचा मंदिर भी है। इस मंदिर की ऊंचाई दिल्ली के कुतुब मीनार से भी ज्यादा है। इस मंदिर की भव्यता को निहारने के लिए हर दिन हजारों लोग यहां आते हैं। सर्व विद्या की राजधानी कहे जाने वाले बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में काशी विश्वनाथ का मंदिर, जिसे बिरला टेंपल के नाम से भी जानते हैं।बीएचयू में स्थित इस मंदिर की ऊंचाई कुतुब मीनार से भी 13 फीट ज्यादा है। बीएचयू में स्थित ये मंदिर कई किलोमीटर दूर से दिखाई देता है।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय स्थित श्री विश्वनाथ मंदिर का शिलान्यास हिमालय के संत स्वामी कृष्णाश्रम ने चार वर्ष की मनुहार के बाद किया था। 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक वाराणसी के श्री काशी विश्वनाथ धाम की तर्ज पर बीएचयू परिसर में शिव मंदिर स्थापित करने के लिए महामना पं. मदन मोहन मालवीय के मन में विचार आया तो उनकी इच्छा थी कि इस मंदिर का शिलान्यास किसी सिद्ध संत के हाथों कराया जाए। मालवीय जी ने हिमालय में रहने वाले संत स्वामी कृष्णाश्रम के बारे में सुना था।

उन्होंने उन्हीं के हाथों मंदिर का शिलान्यास कराने का मन बना लिया। 1926 के आसपास स्वामी कृष्णाश्रम को काशी आने के लिए आमंत्रित किया गया तो वह कतई तैयार न थे। इसके बाद महामना ने स्वामी कृष्णाश्रम को मनाने के लिए स्वामी गणेश दास से निवेदन किया। उन्हें मनाने में चार साल लग गए। इतने मान मनव्वल के बाद स्वामी कृष्णाश्रम तैयार हुए और उन्होंने 11 मार्च 1931 को मंदिर का शिलान्यास किया।

252 फीट है ऊंचाई
नए काशी विश्वनाथ मंदिर के शिखर की ऊंचाई 252 फीट है।दिल्ली के कुतुब मीनार की ऊंचाई 239.5 फीट है।यदि मंदिरों के लिहाज से देखा जाए तो देश का सबसे ऊंचा मंदिर मध्यप्रदेश के ओरछा में स्थित है, जिसका नाम चतुर्भुज मंदिर है। इस मंदिर की कुल ऊंचाई 344 फीट है।लेकिन बात शिखर की करें तो उसकी ऊंचाई 240 फीट है।बीएचयू के काशी विश्वनाथ मंदिर का शिखर 252 फीट ऊंचा है। इस लिहाज से ये मंदिर देश का सबसे ऊंचे शिखर वाला मंदिर है।

1931 में पड़ी नींव
मार्च 1931 में महामना पंडित मदन मोहन मालवीय के आग्रह के बाद तपस्वी स्वामी कृष्णम ने इसकी आधारशिला रखी थी।1954 में उद्योगपति जुगल किशोर बिरला ने इसके निर्माण का काम पूरा कराया।हालांकि उस वक्त भी मंदिर के शिखर का काम अधूरा था। 1962 में ये मंदिर पूरी तरह बनकर तैयार हुआ तो इसके शिखर की ऊंचाई 252 फीट सामने आई।
मंदिर निर्माण में धन की कमी आड़े आई तो युगल किशोर बिड़ला ने मालवीय जी को आश्वस्त किया कि मंदिर निर्माण में धन की कमी नहीं होने दी जाएगी। हालांकि महामना के जीवन काल में मंदिर निर्माण पूर्ण नहीं हो पाया। श्री विश्वनाथ मंदिर के मानित व्यवस्था प्रो. विनय कुमार पांडेय ने बताया कि 1954 में शिखर को छोड़कर पूरा मंदिर बन गया था। 17 फरवरी 1958 को मंदिर में भगवान शिव की प्रतिमा स्थापना और प्राण प्रतिष्ठा की गई। शिखर का काम 1966 में पूर्ण हुआ। लगभग 250 फीट ऊंचा मंदिर का शिखर दुनिया का सबसे ऊंचा माना जाता है।
मंदिर में भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग के अतिरिक्त गणेश, मां दुर्गा, लक्ष्मी-विष्णु, पंचमुखी महादेव, राम सीता और लक्ष्मण, हनुमान, सरस्वती मां, नटराज, नंदी आदि देवताओं की प्रतिमाएं भी मौजूद हैं।

