Sawan 2026: दो भागों में बंटा है ये अद्भुत शिवलिंग, मान्यता-बाबा भोलेनाथ खुद आते हैं भोग ग्रहण करने

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कण-कण शंकर के शहर बनारस को मंदिरों का शहर यूं ही नहीं कहा जाता है। केदारखंड में स्थित गौरी केदारेश्वर मंदिर के शिवलिंग का स्वरूप ही निराला है। यह शिवलिंग दो भागों में बंटा हुआ है। मान्यता है कि एक भाग में भगवान शिव माता पार्वती के साथ तो दूसरे भाग में भगवान विष्णु माता लक्ष्मी के साथ विराजते हैं। केदार घाट के समीप स्थित गौरी केदारेश्वर का, इसके दर्शन से भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान विष्णु, मां लक्ष्मी और मां अन्नपूर्णा के दर्शन व कृपा की प्राप्ति होती है। केदारघाट पर स्थित गौरी केदारेश्वर मंदिर में मान्यता है कि भगवान शिव स्वयं यहां भोग ग्रहण करने आते हैं। यही नहीं इस मंदिर की पूजन विधि भी बाकी मंदिरों की तुलना में अलग है।
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काशी विश्वनाथ से भी प्राचीन है मंदिर
यहां बिना सिला हुआ वस्त्र पहनकर ही ब्राह्मण चार पहर की आरती करते हैं। स्वयंभू शिवलिंग पर बेलपत्र, दूध गंगाजल के साथ ही भोग में खिचड़ी जरूर चढ़ाई जाती है। कहा जाता है कि यह मंदिर श्री काशी विश्वनाथ से भी प्राचीन है। काशी आने पर रानी अहिल्याबाई होल्कर ने जब दर्शन किया तो मंदिर की व्यवस्था को सुधारा।

काशी के इस मंदिर में खिचड़ी स्वरूप में निवास करते हैं बाबा केदारनाथ | Gauri  Kedareshwar Temple, Kashi - Timings, Attractions, Mystery and How to Reach  in Hindi - Hindi Nativeplanet
ऋषि मांधाता की तपस्या से खुश होकर काशी आए गौरी केदारेश्वर
मंदिर के महंत ने बताया कि शिवपुराण में वर्णन है कि ऋषि मांधाता की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने यहां दर्शन दिए थे। भगवान शिव ने कहा था कि चारों युगों में इसके चार रूप होंगे। सत्ययुग में नवरत्नमय, त्रेता में स्वर्णमय, द्वापर में रजतमय और कलियुग में शिलामय होकर यह शुभ मनोकामनाओं को प्रदान करेगा।

गौरी केदारेश्वर मंदिर, वाराणसी - टाइम्सट्रैवल
दो भागों के हो जाने से यह हरिहरात्मक और शिवशक्तयात्मक हो गया है। अन्न से निर्मित होने के कारण इसमें अन्नपूर्णा निवास करेंगी। इस लिंग के दर्शन पूजन से भक्त के गृह में अन्नपूर्णा सदा निवास करेगीं। इतना कह कर भगवान इसी लिंग में अन्तर्ध्यान हो गए।

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