Sawan 2026: काशी के इस शिवमंदिर में 4 बेटों को लेकर आए थे राजा दशरथ, दर्शन मात्र से पापों का होता है शयन

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काशी पुराधिपति की नगरी में उनका आशीष लेने के लिए मानव तो दूर देवी-देवताओं, ऋषि-मुनियों और राजाओं ने भी शिवलिंग की स्थापना की और शिवलोक के भागी बने। उन्हीं में एक शिवलिंग अयोध्या के राजा दशरथ ने भी दशाश्वमेध घाट पर स्थापित किया था। इसे दशहरेश्वर महादेव नाम से जाना जाता है। बड़ी शीतला माता के गर्भगृह में स्थापित इस शिवलिंग के दर्शन मात्र से 10 जन्मों के पापों का शमन जाता है।सावन में यहां भी दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालु पहुंचते हैं और माता शीतला और बाबा के दर्शन पूजन कर पुण्यफल को प्राप्त करते हैं। बड़ी शीतला माता मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए दूर-दराज से लोग पहुंचते हैं। माता के साथ दशहरेश्वर महादेव का भी दर्शन करते हैं। माता के गर्भगृह में यह शिवलिंग स्थापित है। 

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 कहा गया है कि त्रेता युग में भगवान श्रीराम की प्रसिद्धि को देखकर हनुमान जी ने कहा कि प्रभु आप से बड़ा शक्तिशाली दुनिया में कोई नहीं है। प्रभु श्रीराम इसे मानने से इनकार कर दिया, लेकिन हनुमान जी भी नहीं माने। फिर प्रभु श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न पर माता शीतला चेचक के रूप में प्रकट हुईं और चारों भाई बीमार हो गए। हनुमान जी ने इसे देख श्रीराम जी से पूछा यह क्या हुआ प्रभु। 

श्रीराम जी ने कहा कि वही, जिसे आप नहीं मान रहे थे। राजा दशरथ समेत सभी रानियां यह देखकर परेशान हो गईं। इसके बाद राजा ने कुलगुरु वशिष्ठ को बुलाया। उन्होंने काशी में बड़ी शीतला माता के दर्शन करने को कहा। राजा दशरथ रानियों व चारों पुत्रों के साथ काशी आए और माता शीतला का दर्शन पूजन किया।

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