सिर्फ ‘मथुरा-वृंदावन’ ही नहीं इन जगहों की होली भी होती है कमाल, रंगों में हो जाएंगे सराबोर

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होली का नाम आते ही ज़हन में सबसे पहले मथुरा-वृंदावन की लठमार और फूलों वाली होली की तस्वीर ही आती है. राधा-कृष्ण की नगरी में रंगों का जो आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संगम दिखता है, वह वाकई अनोखा होता है. जिसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग भी आते हैं. कुछ लोग तो हर साल मथुरा की इन होली का जश्न मनाने जाते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि सिर्फ मथुरा और वृंदावन में ही नहीं बल्कि देश के कई हिस्सों में होली का एक अलग ही जश्न देखने को मिलता है. इन जगहों पर अलग-अलग तरह से होली सेलिब्रेट की जाती है, जो वाकई देखने लायक होती है.

होली सिर्फ रंग लगाने का त्योहार नहीं, बल्कि यह दिलों से दूरियां मिटाने, बीते गिले-शिकवे भूल जाने और रिश्तों में नई मिठास घोलने का एक मौका होता है. अलग-अलग राज्यों और शहरों में य उत्सव अलग रंग-रूप में देखने को मिलता है. कहीं सूखे गुलाल की खुशबू में, कहीं ढोल-नगाड़ों की गूंज, तो कहीं पारंपरिक व्यंजनों और लोककथाओं का स्वाद. चलिए इस आर्टिकल में जानते हैं ऐसी ही 5 जगहें जहां की होली एक बार तो आपको जरूर एक्सपीरियंस करनी चाहिए.

बरसाना में लट्ठमार होली शुरू
बरसाना की लट्ठ मार होली
बरसाना की होली दुनियाभर में लठमार होली के नाम से मशहूर है. यहां महिलाएं प्रतीकात्मक रूप से पुरुषों पर लाठियां बरसाती हैं और पुरुष ढाल लेकर खुद को बचाते हैं. यह परंपरा राधा-कृष्ण की लीलाओं से जुड़ी मानी जाती है. रंग और भक्ति का यह अनोखा संगम बरसाना की होली को बिल्कुल अलग बनाता है. 25 फरवरी को बरसाना की लट्ठ मार होली मनाई जाएगी, जो वाकई एक बार तो आपको जरूर देखनी चाहिए.

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वाराणसी में भी होली का जश्न
काशी की होली में आध्यात्म और मस्ती का अनूठा मेल देखने को मिलता है. यहां की सिर्फ दिवाली ही नहीं बल्कि होली भी काफी कमाल की होती है. यहां गंगा घाटों पर रंगों के साथ-साथ संगीत, भांग और ठंडाई की धूम रहती है. शिवभक्तों की टोली, ढोल-नगाड़ों की गूंज और घाटों पर उड़ता गुलाल सब मिलकर वाराणसी की होली को बेहद खास बनाते हैं.

शांतिनिकेतन में होली के एक अनोखे अनुभव का आनंद लें | ब्लॉग - जस्टरैवल

शांतिनिकेतन की होली
पश्चिम बंगाल के शांतिनिकेतन में होली को बसंत उत्सव के रूप में मनाई जाती है. यहां रंगों के साथ रवींद्रनाथ टैगोर की परंपरा जुड़ी है. छात्र-छात्राएं पीले वस्त्र पहनकर गीत, नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए वसंत और होली का स्वागत करते हैं. ये होली शोर से ज्यादा सौंदर्य और कला की पहचान मानी जाती है. अगर आपको भी शांत और सुकून देने वाली होली मनानी है तो आप शांतिनिकेतन जा सकते हैं.

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उदयपुर की शाही होली भी कमाल
उदयपुर की होली शाही अंदाज के लिए जानी जाती है. यहां मेवाड़ राजघराने की परंपराओं के साथ होलिका दहन और भव्य जुलूस निकाले जाते हैं. राजसी पोशाकें, सजे-धजे हाथी-घोड़े और लोकनृत्य उदयपुर की होली को एक शाही उत्सव बना देते हैं. शाही फील के लिए आपको एक बार उदयपुर की होली जरूर मनानी चाहिए.

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प्रयागराज की धूम-धड़ाके वाली होली
संगम नगरी प्रयागराज में भी होली का एक अलग ही जश्न देखने को मिलता है. यहां कपड़ा फाड़ होली काफी मशहूर है. जहां मोहल्लों में सामूहिक होली खेली जाती है. जिसमें पुरुष एक दूसरे के कपड़े तक फाड़ते हैं. इतना ही नहीं म्यूजिक और मेल-मिलाप कर होली को एक बेहद प्यारा रंग दिया जाता है.

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