क्या आप जानती हैं भारत में कहां होती है सबसे ज्यादा बारिश? मॉनसून में जा सकती हैं घूमने
मेघालय में एक ऐसी खूबसूरत जगह है, जहां का मौसम पूरे साल सुहावना रहता है। इस जगह को भारत के सबसे अधिक वर्षा वाली जगह में गिना जाता है। यहां साल के कई महीने लगातार बारिश होती रहती है। यही कारण है कि इसे बादलों का घर भी कहा जाता है। यहां का मौसम इतना सुहावना रहता है कि गर्मियों में भी लोग सुकून से रहते है। यहां की हरियाली भी सालभर बनी रहती है। मेघालय का मावसिनराम केवल बारिश के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी अनूठी संस्कृति के लिए भी फेमस है। आज के इस आर्टिकल में हम आपको मानसून में जाने के लिए जरूरी टिप्स विस्तार से बताएंगे।

यहां क्यों जाना अच्छा होगा?
मावसिनराम में माना जाता है कि सबसे ज्यादा बारिश होती है।
सालभर मौसम सुहावना रहता है।
खूबसूरत प्राकृतिक नजारे देख पाएंगी।
मावजिम्बुइन गुफा देखने जरूर आएं।
दिल्ली से मावसिनराम कैसे पहुंचें?
यहां आने के लिए सबसे पहले आपको गुवाहाटी आना होगा। आप फ्लाइट से यहां पहुंच सकती हैं, क्योंकि इसमें आपको लगभग 3 घंटे का समय लगेगा। ट्रेन से जाने वाले लोगों के लिए 30-36 घंटे का समय लग जाता है। अगर कम समय में ट्रिप प्लान करना है, तो आपको फ्लाइट से जाना चाहिए।
गुवाहाटी से शिलांग जाएं
गुवाहाटी पहुंचने के बाद आपको शिलांग जाना होगा। शिलांग के लिए आप बस ले सकती हैं। टैक्सी और बस दोनों सुविधा मिलती है, लेकिन बस से जाना आपको सस्ता पड़ेगा। गुवाहाटी से शिलांग लगभग 100 किमी की दूरी पर स्थित है। आपको लगभग 4 घंटे लग जाएंगे पहुंचने में।

शिलांग से जाएं मावसिनराम
शिलांग से आपकी मावसनराम की यात्रा की शुरु होती है, यह सफर सबसे ज्यादा सुहावना होता है। शिलांग से मावसिनराम लगभग 60 किमी की दूरी पर स्थित है। आपको लगभग 3 घंटे लग जाएंगे पहुंचने में। आप यह सफर टैक्सी से कर सकती हैं, क्योंकि असली यात्रा सहां से शुरू होती है। जून से सितंबर के बीच यहां जाना अच्छा कहा जाता है।
व्यू पॉइंट्स और घाटियां
यहां आप हरे-भरे पहाड़ और बादलों से ढकी घाटियां घूमने जा सकती हैं। गांव का प्राकृतिक जीवन देखना सबसे अच्छा अनुभव होता है। ध्यान रखें कि यहां आपको मॉल या पब नहीं मिलेगा, लेकिन प्रकृति, शांति, बादलों और बारिश का नजारा देखने के लिए इससे अच्छा और क्या होगा।
ध्यान रखें कि सड़क ज्यादातर अच्छी और पक्की हैं। रास्ते में पहाड़ी मोड़ आएंगे और बारिश में फिसलन मिल सकती है। उत्तराखंड या हिमाचल के कई पहाड़ी रास्तों के मुकाबले यहां की सड़के बेहतर हैं।

