सावन भर सारंगनाथ संग सारनाथ में विराजते हैं भोलेनाथ, अनोखी है इसके पीछे की कहानी

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वाराणसी दुनिया के प्राचीनतम शहरों में से एक है. इस शहर में कई चमत्कारिक शिवलिंग और प्राचीन मंदिर है.इसी काशी में भगवान शिव का अद्भुत और अनोखा देवलोक भी है.महादेव के इस चमत्कारिक देवलोक में ऐसा मंदिर जिसके अरघे में एक नहीं बल्कि दो शिवलिंग विराजमान है.जिसे देख हर कोई चौक जाता है. अरघे में विराजे दो शिवलिंग वाले इस मंदिर की दास्तां भी गजब है.

काशी में एक ऐसा मंदिर भी है, जहां बाबा विश्वनाथ अपने साले सारंग ऋषि के साथ विराजमान हैं. मान्यता है कि सावन में यहां एक बार दर्शन करने से पूरे साल भर का बाबा विश्वनाथ के दर्शन का फल प्राप्त होता है. साथ ही दर्शन करने से चर्म रोग से भी मुक्ति मिलती है. यहां सारंगदेव को गोंद चढ़ाकर लोग अपनी मनोकामना पूर्ण करते हैं. सारंगनाथ मंदिर में बाबा भोलेनाथ से पहले उनके साले की पूजा की जाती है. लेकिन क्यो? चलिए आपको बताते है.

 लोक कथाओं के अनुसार भगवान शंकर की शादी सती से हुई थी, जिनके पिता राजा दक्षप्रजापति थे. सती के भाई सारंग ऋषी विवाह के दौरान अपने घर पर नहीं थे. वह विद्या ग्रहण करने के लिए गुरुकुल गए हुए थे. विवाह उपरांत सारंग ऋषि जब घर लौटे, तो उन्होंने अपने पिता से कहा कि उन्होंने अन्याय किया. एक राजकुमारी की विवाह ऐसे इंसान से कर दिया, जिसके पास न घर है. न पहनने को वस्त्र हैं. भोजन में भांग धतूरे खाते हैं. मृग छाल पहनकर टहलते हैं. भस्मी रमाते हैं. आपने राजकुमारी की शादी ऐसे आदमी से कर दी.

Sawan 2022 Kashi Vishwanath resides in Sarnath with Sarangnath throughout Sawan month  wishes are fulfilled by darshan pujan
सारंगनाथ मंदिर में स्थापित है दो शिवलिंग
सारंग ऋषि ने की यहां तपस्याः श्यामसुंदर दीक्षित ने बताया कि इसके बाद सारंग ने कहा उन्हें अपनी बहन के लिए काशी में कुछ महल बनवाने हैं. इसके बाद वह बहुत सारा सोना और मुद्रा लेकर काशी आने लगे. बीच मार्ग में काशी से पहले ऋषीपतंग मार्ग पड़ा. यहां बहुत बड़ा बरगद का पेड़ था. वह यहीं पर थोड़ी देर विश्राम करने लगे, इस दौरान उन्हें नींद लग गयी. तब उन्होंने स्वप्न में देखा की पूरी काशी सोने की है. इसके बाद उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ और बाबा विश्वनाथ से क्षमा याचना करते हुए, उन्होंने यहीं पर कई वर्षों तक घोर तपस्या की. उनके शरीर से लावा फटने लगा. इसके बाद बाबा विश्वनाथ प्रसन्न होकर उन्हें दर्शन दिया और तीन वरदान भी दिए.

Sarangnath Mahadev Temple of Varanasi will soon be rejuvenated

ये थे तीन वरदानः बाबा विश्वनाथ ने प्रसन्न होकर यहां पर सारंग ऋषि से कहा, कि हम तुम्हें तीन वरदान दे रहे हैं.

1. हमारे स्वरूप में तुम्हारी यहां पर पूजा होगी.

2. सावन के महीने में जो यहां पर 1 दिन दर्शन करेगा. उसे मेरे दर्शन करने के पूरे साल भर का फल प्राप्त होगा.

3. जो भी व्यक्ति सच्चे मन से कुछ मांगेगा. उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी.

मंदिर में भगवान शिव से पहले होती है सांरग ऋषि की पूजा
भगवान बुद्ध ने दिया था उपदेशः श्रद्धालु राघवेंद्र मिश्रा ने बताया कि वह बाबा का प्रतिदिन दर्शन-पूजन करते हैं. मान्यता है कि बाबा विश्वनाथ सावन भर यहीं पर अपने साले के साथ विराजते हैं. उनके साले का नाम सारंग ऋषि है. यह अनोखा मंदिर है. यहां पर एक साथ दो शिवलिंग हैं. पहले सारंग ऋषि की पूजा होती है, फिर बाबा विश्वनाथ की होती है. पूरे सावनभर में लोग दूर-दूर से दर्शन करने के लिए आते हैं. कहा जाता है कि मंदिर के 50 मीटर की लगभग दूरी पर ज्ञान प्राप्त होने के बाद भगवान बुद्ध ने यहीं पर अपने पांच शिष्यों को उपदेश भी दिया था.

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सावन में विशेष महिमा 
पूर्वांचल भर से आस्‍थावान बाबा दरबार सहित प्रमुख मंदिरों में जलाभिषेक करने आते हैं। खासकर सावन के हर सोमवार पर बाबा का दर्शन पूजन जलाभिषेक, दुग्‍धाभिषेक और प्रमुख तौर पर प्रसाद चढ़ाने और मन्‍नत की कामना के साथ आस्‍था का सावन काशी में पूरे माह चरम पर रहता है। सामन में सोमवार को व्रत पूजन दर्शन, दरश-परश ही नहीं बल्कि रुद्राभिषेक कराने वालों की आस्‍था काशी में उमड़ती है। 

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