दिखने में लिट्टी जैसी पर स्वाद अलग: जानें पूर्वांचल के जायके मकोनी की खासियत

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बदलते समय के साथ न केवल रहन-सहन बदला बल्कि सदियों से चले आ रहे जायके की पारंपरिक दुनिया विलुप्त सी होती जा रही है। उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल और बिहार के लोकप्रिय भोजन का जिक्र होती ही जुबान पर लिट्टी चोखा का नाम न आए भला ऐसे कैसे हो सकता है। मगर क्या आपको पता है कि इसकी तरह दिखने वाली एक और डिश है, जो कभी देसी स्वादों की जान हुआ करती थी। हम बात कर रहे हैं अवध-पूर्वांचल की मशहूर मकोनी के बारे में। मकोनी दिखने में काफी हद तक लिट्टी जैसी ही लगती है। आज के इस लेख में हम आपको इस डिश की खासियत के बारे में बताने जा रहे हैं।

मकोनी और लिट्टी में क्या है अंतर?

मकोनी और लिट्टी की बनावट में कुछ खास फर्क नहीं है। ऐसे में लोग मकोनी को लिट्टी समझ लेते हैं। इनमें अलग-अलग स्टाफिंग का इस्तेमाल किया जाता है। जहां लिट्टी के अंदर भुने हुए चने का सत्तू भरा जाता है, वहीं मकोनी के अंदर भीगी हुई काली उड़द की दाल या चने की दाल का इस्तेमाल होता था। इसी वजह से इसका स्वाद लिट्टी से अलग और खास है।

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मकोनी की स्टाफिंग का सेंकने का तरीका

मकोनी के अंदर भरी जाने वाली स्टाफिंग चने के दाल या उड़द दाल का इस्तेमाल किया जाता है। दाल को दरदरा पीसकर इसमें प्याज, हरी मिर्च, लहसुन, अदरक, आम के अचार का मसाला और सरसों का तेल डालकर मिश्रण बनाया जाता था। इसके बाद इसे उपले की धीमी आंच पर सेंका जाता था। फिर हाथ से दबाकर बैंगन-आलू के भर्ते के साथ परोसा जाता था।

Purvanchal cuisine
मकोनी कहां की पारंपरिक डिश है?

मकोनी मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश और इससे सटे बिहार के कुछ हिस्सों की एक बेहद मशहूर और पारंपरिक डिश है। यह उत्तर प्रदेश के जौनपुर, बनारस , आजमगढ़, गाजीपुर और बलिया जैसे जिलों में बहुत चाव से बनाई और खाई जाती है। हालांकि, धीरे-धीरे ये डिश गायब हो गई है।

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