व्रत में भी बढ़ सकती है शुगर, डायबिटीज के मरीज नवरात्रि में क्या न खाएं?

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नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा के साथ ही बड़ी संख्या में लोग नौ दिनों तक व्रत रखते हैं। व्रत के दौरान खानपान में बदलाव किया जाता है और कुछ लोग लंबे समय तक बिना कुछ खाए रहते हैं। लेकिन अगर आप डायबिटीज के मरीज हैं, तो नवरात्रि का व्रत रखते समय विशेष सावधानी बरतना जरूरी है। व्रत में खाए जाने वाले कुछ खाद्य पदार्थ ब्लड शुगर लेवल को तेजी से बढ़ा सकते हैं। वहीं, लंबे समय तक भूखे रहने से शुगर अचानक कम होने यानी हाइपोग्लाइसीमिया का खतरा भी हो सकता है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या डायबिटीज के मरीजों को नवरात्रि का व्रत रखना चाहिए? व्रत के दौरान किन चीजों को खाने से बचना चाहिए और खानपान का सही तरीका क्या है? आइए समझते हैं।

क्या डायबिटीज के मरीजों को लंबे समय तक भूखा रहना चाहिए?
डायबिटीज के मरीजों के लिए लंबे समय तक भूखे रहना हमेशा सुरक्षित नहीं होता। इसका जोखिम इस बात पर निर्भर करता है कि मरीज को किस प्रकार की डायबिटीज है, उसका ब्लड शुगर कितना नियंत्रित है और वह कौन-सी दवाएं या इंसुलिन ले रहा है।खासतौर पर इंसुलिन या कुछ ऐसी दवाएं लेने वाले मरीजों में लंबे समय तक भोजन न करने से ब्लड शुगर खतरनाक स्तर तक गिर सकती है। दूसरी ओर, व्रत में अधिक मात्रा में मीठे फल, आलू या मीठे पेय पदार्थ लेने से शुगर बढ़ भी सकती है।

इसलिए डायबिटीज के मरीजों को व्रत रखने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। डॉक्टर की सलाह के बिना दवाओं की खुराक बदलना या इंसुलिन छोड़ना सही नहीं है।

नवरात्रि में डायबिटीज के मरीज किन चीजों को खाने से बचें?

साबूदाना और साबूदाने की खिचड़ी

नवरात्रि के व्रत में साबूदाने की खिचड़ी, साबूदाना वड़ा और साबूदाने की खीर खूब खाई जाती है। साबूदाना मुख्य रूप से स्टार्च से भरपूर होता है और इसमें प्रोटीन तथा फाइबर कम होता है। इसे अधिक मात्रा में खाने से ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकती है। अगर आप इसे खाते हैं, तो मात्रा सीमित रखें और इसे आलू के साथ अधिक मात्रा में खाने से बचें।

आलू से बनी चीजें

व्रत में आलू की सब्जी, आलू के चिप्स, फ्रेंच फ्राइज जैसी चीजों का सेवन बढ़ जाता है। आलू में कार्बोहाइड्रेट अधिक होता है, इसलिए इसकी बड़ी मात्रा ब्लड शुगर पर असर डाल सकती है। खासकर डीप फ्राई आलू से बनी चीजें नियमित रूप से खाना उचित नहीं है। आलू खाते समय मात्रा पर ध्यान दें और पूरे दिन के कुल कार्बोहाइड्रेट का हिसाब रखें।

कुट्टू और सिंघाड़े के आटे से बनी तली हुई चीजें

कुट्टू और सिंघाड़े के आटे से पूरी, पकौड़े और अन्य पकवान बनाए जाते हैं। इन आटों से बनी चीजें भी कार्बोहाइड्रेट प्रदान करती हैं। जब इन्हें अधिक तेल में तलकर या बड़ी मात्रा में खाया जाता है, तो कैलोरी की मात्रा बढ़ जाती है। इसलिए इनसे बनी पूरियों और पकौड़ों की जगह कम तेल में बनी रोटी या चीला चुनना बेहतर हो सकता है। मात्रा का ध्यान रखना भी जरूरी है।

ज्यादा मीठे फल और फलों का जूस

व्रत में फल खाना आम बात है, लेकिन डायबिटीज के मरीजों को फलों का चुनाव और उनकी मात्रा सोच-समझकर करनी चाहिए। अंगूर, आम या अन्य मीठे फलों को बड़ी मात्रा में खाने से ब्लड शुगर बढ़ सकती है। इसका मतलब यह नहीं है कि इन फलों को पूरी तरह छोड़ना जरूरी है।साबुत फल खाना जूस पीने की तुलना में बेहतर विकल्प है, क्योंकि साबुत फल में फाइबर मौजूद रहता है। जूस में फाइबर कम हो सकता है और थोड़े समय में कई फलों की शुगर शरीर में पहुंच सकती है। फलों का जूस, शहद और चीनी मिलाकर बनाए गए पेय पदार्थों से बचें।

मीठी खीर और मिठाइयां

नवरात्रि में मखाने की खीर, साबूदाने की खीर और अन्य मीठे पकवान बनाए जाते हैं। इनमें चीनी, गुड़ या अन्य मीठी सामग्री मिलाने से कार्बोहाइड्रेट की मात्रा बढ़ जाती है। गुड़ और शहद को भी डायबिटीज के मरीजों के लिए पूरी तरह सुरक्षित विकल्प नहीं माना जा सकता, क्योंकि ये भी ब्लड शुगर बढ़ा सकते हैं।अगर मीठा खाने का मन हो, तो बिना अतिरिक्त चीनी वाला सीमित मात्रा का विकल्प चुनें और अपने डॉक्टर या डाइटीशियन की सलाह के अनुसार भोजन की योजना बनाएं।

तले हुए स्नैक्स और नमकीन

व्रत के दौरान मूंगफली, आलू के चिप्स, तली हुई नमकीन और पकौड़े खाने की आदत भी ब्लड शुगर नियंत्रण को मुश्किल बना सकती है। इनमें कार्बोहाइड्रेट, कैलोरी और वसा अधिक हो सकती है। अधिक तला हुआ भोजन वजन और हृदय स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर डाल सकता है। इसके बजाय सीमित मात्रा में बिना अधिक नमक वाले मेवे या अन्य उपयुक्त स्नैक्स चुने जा सकते हैं।

व्रत में क्या खाएं, ताकि ब्लड शुगर नियंत्रित रहे?

डायबिटीज के मरीजों को व्रत के दौरान केवल इस बात पर ध्यान नहीं देना चाहिए कि क्या नहीं खाना है, बल्कि संतुलित भोजन की योजना भी बनानी चाहिए।

साबुत फल-डॉक्टर या डाइटीशियन की सलाह के अनुसार उचित मात्रा में साबुत फल खाएं।
दही-बिना चीनी वाला सादा दही चुनें, यदि वह आपके व्रत के नियमों के अनुकूल हो।
मेवे-बादाम और अखरोट जैसे मेवे सीमित मात्रा में खा सकते हैं।
कम तेल वाले पकवान-तली हुई पूरियों की जगह कम तेल में बना कुट्टू या अन्य व्रत-अनुकूल पकवान चुनें।
पर्याप्त पानी- शरीर में पानी की कमी न होने दें। यदि डॉक्टर ने तरल पदार्थ सीमित करने की सलाह दी है, तो उसी का पालन करें।
संतुलित मात्रा-एक बार में बहुत ज्यादा खाने के बजाय डॉक्टर की सलाह के अनुसार भोजन का समय और मात्रा तय करें।
ध्यान रखें कि व्रत में खाई जाने वाली हर चीज स्वाभाविक रूप से हेल्दी या डायबिटीज के लिए सुरक्षित नहीं होती। भोजन की मात्रा, बनाने का तरीका और पूरे दिन में लिए गए कार्बोहाइड्रेट की कुल मात्रा भी महत्वपूर्ण है।

व्रत के दौरान ब्लड शुगर की निगरानी क्यों जरूरी है?

नवरात्रि के दौरान खानपान और दिनचर्या बदलने से ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव हो सकता है। इसलिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित रूप से ब्लड शुगर की जांच करें। यदि आप इंसुलिन या ऐसी दवाएं लेते हैं जिनसे शुगर कम होने का खतरा रहता है, तो निगरानी और भी महत्वपूर्ण है।

अगर पसीना आना, हाथ कांपना, अचानक भूख लगना, चक्कर आना, दिल की धड़कन तेज होना या भ्रम जैसी समस्याएं हों, तो ये कम ब्लड शुगर के संकेत हो सकते हैं। ऐसे में व्रत जारी रखने पर जोर न दें। अपनी हाइपोग्लाइसीमिया संबंधी चिकित्सा योजना का पालन करें और जरूरत पड़ने पर तुरंत सहायता लें। बेहोशी या गंभीर भ्रम की स्थिति में मुंह से कुछ भी न दें और आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।

इसी तरह, बहुत ज्यादा प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, उल्टी या अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षणों को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

डायबिटीज के मरीज इन बातों का रखें ध्यान

नवरात्रि में व्रत रखना व्यक्तिगत आस्था का विषय है, लेकिन स्वास्थ्य से समझौता करना ठीक नहीं है। जिन मरीजों का ब्लड शुगर नियंत्रित नहीं है, जिन्हें बार-बार शुगर कम होने की समस्या होती है या जिन्हें किडनी, हृदय अथवा अन्य गंभीर बीमारियां हैं, उन्हें व्रत रखने से पहले डॉक्टर से विशेष सलाह लेनी चाहिए।

डायबिटीज के मरीजों के लिए नवरात्रि में सबसे जरूरी है ब्लड शुगर की निगरानी, संतुलित खानपान और दवाओं का सही प्रबंधन। साबूदाना, आलू, तली हुई पूरियां, मीठी खीर और जूस का अधिक सेवन ब्लड शुगर बढ़ा सकता है। इसलिए व्रत रखने से पहले अपनी सेहत और दवाओं के अनुसार डॉक्टर से व्यक्तिगत सलाह लें।

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