लोक कल्याण के लिए नारद जी के संवाद आज भी प्रासंगिक : प्रो. संजय द्विवेदी
कानपुर, 03 मई (हि.स.)। पत्रकारिता केवल सूचना देने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने का सशक्त उपकरण है। नारद जी का संवाद लोकमंगल और सत्य पर आधारित था, उनके संवाद से बड़े-बड़े संकट दूर हुए और तीनों लोकों में उनका सम्मान था। आज के पत्रकारों को उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर समाजहित में कार्य करना चाहिए। ‘स्व’ का बोध राष्ट्र के विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। यह बातें रविवार को प्रो. संजय द्विवेदी ने कही।
छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में देवर्षि नारद जयंती के अवसर पर “राष्ट्रवादी पत्रकारिता में स्व का बोध” विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन आभासी माध्यम से किया गया। कार्यक्रम में पत्रकारिता के मूल्यों, दायित्वों और राष्ट्र निर्माण में जनसंचार की भूमिका पर विस्तार से चर्चा हुई।
मुख्य वक्ता प्रो. संजय द्विवेदी ने कहा कि पत्रकारिता का मूल उद्देश्य लोकमंगल होना चाहिए। उन्होंने देवर्षि नारद के संचार स्वरूप को आदर्श बताते हुए कहा कि उनका संवाद तीनों लोकों में प्रभावी था और वे सदैव सार्थक संवाद करते थे। नारद जी का चरित्र अत्यंत पवित्र था और उन्हें हर स्थान पर सम्मान प्राप्त था। उन्होंने कहा कि नारद जी ने संवाद के माध्यम से बड़े-बड़े संकटों का समाधान किया, जो आज के पत्रकारों के लिए प्रेरणा है।
उन्होंने प्रथम हिंदी समाचार पत्र ‘उदंत मार्तंड’ के संपादक पंडित जुगल किशोर शुक्ल का उल्लेख करते हुए बताया कि 30 मई 1826 को नारद जयंती के दिन ही इसका प्रकाशन हुआ था। उन्होंने कहा कि भारत विश्व को ज्ञान देने वाला देश है और इसी कारण इसे विश्वगुरु कहा जाता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहा कि देवर्षि नारद को भारतीय परंपरा में प्रथम पत्रकार माना जाता है, जिन्होंने सदैव सत्य और लोकहित को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि अपनी संस्कृति, कर्तव्यों और मूल्यों की पहचान ही ‘स्व’ का बोध है और यही राष्ट्र के विकास का आधार है।
विभागाध्यक्ष डॉ. दिवाकर अवस्थी ने कहा कि यह अवसर पत्रकारिता के मूल्यों पर आत्ममंथन का है। कार्यक्रम के संयोजक डॉ. हरिओम कुमार ने कहा कि वैश्विक स्तर पर संवाद स्थापित करने के लिए नारद संचार प्रतिरूप को अपनाने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ. ओम शंकर गुप्ता ने कहा कि नारद जी का व्यक्तित्व और कार्यशैली जनसंचार जगत के लिए मार्गदर्शक है तथा विद्यार्थियों को नारद संवाद का गहन अध्ययन करना चाहिए।
अंत में विभाग के सह आचार्य डॉ. योगेंद्र कुमार पांडेय ने धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम में डॉ. जितेंद्र डबराल, प्रेम किशोर शुक्ला, सागर कनौजिया सहित बड़ी संख्या में शिक्षक और छात्र आभासी रूप से जुड़े।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप