रामनगरी में गेंदा की खेती से बदली प्रदीप की तकदीर

 


अयोध्या, 09 जनवरी (हि.स.)। भगवान राम की नगरी के रूप में विश्व प्रसिद्ध अयोध्या अब फूलों की खेती के लिए भी अपनी नई पहचान बना रही है। योगी सरकार में यहां गेंदा की खेती ने किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कम लागत और अधिक मुनाफे वाली इस खेती ने परंपरागत फसलों से हटकर व्यावसायिक बागवानी की ओर किसानों को प्रेरित किया है। एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना के तहत अमानीगंज विकासखंड के ग्राम सुमेरपुर निवासी किसान प्रदीप कुमार की सफलता की कहानी इसी का जीता-जागता उदाहरण है।

प्रदीप कुमार पहले परंपरागत तरीके से गेंदा की खेती करते थे, लेकिन वर्ष 2024-25 में उद्यान विभाग की प्रेरणा और मार्गदर्शन से उन्होंने इसे व्यवस्थित रूप से अपनाया। मात्र 0.2 हेक्टेयर भूमि पर गेंदा की खेती शुरू की। तीन महीने में फसल तैयार हुई और उन्होंने 75 क्विंटल गेंदा फूल उत्पादित किया। इसे नाका बाजार मकबरा और नवीन सब्जी मंडी में 5500 से 6000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बेचा। कुल आमदनी लगभग 4.20 लाख रुपये हुई, जबकि व्यय मात्र 45 हजार रुपये था। इस प्रकार शुद्ध लाभ 3.75 लाख रुपये रहा। यह कम लागत में उच्च मुनाफे का शानदार मॉडल है, जो अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन रहा है।

मंदिर निर्माण के बाद बागवानी की ओर किसानों का रुख

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना के तहत उद्यान विभाग फूलों की खेती को बढ़ावा दे रहा है। राम मंदिर निर्माण और पर्यटन वृद्धि से अयोध्या में फूलों की मांग बढ़ी है, जिससे गेंदा जैसे फूलों की खेती लाभकारी साबित हो रही है। किसान अब धान-गेहूं जैसी पारंपरिक फसलों को छोड़कर बागवानी की ओर रुख कर रहे हैं।

गेंदा की खेती बनी अब नई पहचान

प्रदीप कुमार की यह सफलता अन्य किसानों के लिए मिसाल है। उद्यान विभाग की सक्रियता से अयोध्या के ग्रामीण क्षेत्रों में बागवानी क्रांति आ रही है। इससे न केवल किसानों की आय बढ़ रही है, बल्कि क्षेत्र की अर्थव्यवस्था भी मजबूत हो रही है। गेंदा की खेती अब अयोध्या के किसानों की नई पहचान बन चुकी है।

विभाग का प्रयास अधिक से अधिक किसानों को जोड़ना

जिला उद्यान अधिकारी अरुण कुमार तिवारी ने इस सफलता पर कहा कि प्रदीप कुमार जैसे किसानों की मेहनत और विभागीय मार्गदर्शन से अयोध्या में फूलों की खेती नई ऊंचाइयों को छू रही है। प्रदेश सरकार की योजनाओं से किसानों को तकनीकी सहायता, उन्नत बीज और बाजार सुविधाएं मिल रही हैं। गेंदा की खेती कम पानी और कम निवेश में अधिक लाभ देती है। हमारा विभाग अधिक से अधिक किसानों को इससे जोड़ने का प्रयास कर रहा है, ताकि रामनगरी के किसान आर्थिक रूप से सशक्त बनें और यह क्षेत्र फूल उत्पादन का हब बने।

हिन्दुस्थान समाचार / पवन पाण्डेय