रसूलपुर गोगोमऊ-पामन-लालपुर खंड में ऑटोमैटिक सिग्नलिंग का सफल शुभारम्भ

 


-रेल परिचालन की संरक्षा, क्षमता और समयबद्धता में होगा अभूतपूर्व सुधार

प्रयागराज, 28 मार्च (हि.स)। उत्तर मध्य रेलवे ने रेल परिचालन को आधुनिक, सुरक्षित एवं अधिक दक्ष बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। शनिवार को झाँसी मंडल के अंतर्गत रसूलपुर गोगोमऊ–पामन–लालपुर खंड (कुल लंबाई 18.40 किमी) में उन्नत ऑटोमैटिक सिग्नलिंग प्रणाली को सफलतापूर्वक कमीशन कर दिया गया है।

वरिष्ठ जनसम्पर्क अधिकारी अमित मालवीय ने बताया कि इस उन्नत प्रणाली के लागू होने से एक ही ट्रैक पर ट्रेनों का परिचालन कम अंतराल पर भी पूरी तरह से सुरक्षित रूप से संभव हो सकेगा। इससे न केवल लाइन क्षमता में भारी वृद्धि होगी, बल्कि ट्रेनों की समयबद्धता में भी उल्लेखनीय सुधार आएगा। नई ऑटोमैटिक सिग्नलिंग प्रणाली मानवीय त्रुटियों की संभावना को न्यूनतम करती है, जिससे यात्रियों की सुरक्षा का स्तर और अधिक सुदृढ़ हो गया है।

उन्होंने बताया कि यह महत्वपूर्ण परियोजना उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह के कुशल मार्गदर्शन तथा प्रधान मुख्य सिग्नल एवं दूरसंचार अभियंता सतेंद्र कुमार, मुख्य सिग्नल एवं दूरसंचार अभियंता (प्रोजेक्ट–II) भोलेन्द्र सिंह एवं मुख्यालय टीम के सक्रिय सहयोग से निर्धारित समय में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई।

इस परियोजना की प्रमुख विशेषताएँ :

-ABS प्रणाली की कमीशनिंग: 18.40 किलोमीटर लम्बे इस पूरे खंड में ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग (ABS) प्रणाली का सफलतापूर्वक क्रियान्वयन किया गया है।

-23 नए ऑटोमैटिक सिग्नल: ब्लॉक सेक्शन को छोटे-छोटे भागों में विभाजित करने के लिए 23 नए ऑटोमैटिक सिग्नल स्थापित किए गए हैं। इससे ट्रेनों का संचालन अधिक घनत्व एवं सुरक्षा के साथ संभव हुआ है।

-सटीक ट्रैकिंग: कुल 121 डिटेक्शन पॉइंट्स एवं 119 ट्रैक सेक्शन का प्रावधान किया गया है। इससे ट्रेन की सटीक लोकेशन का निर्धारण होता है और सिग्नलिंग की विश्वसनीयता बढ़ती है।

-आस्पेक्ट सिग्नलिंग में अपग्रेडेशन: 11 सिग्नलों को 4-आस्पेक्ट सिग्नलिंग प्रणाली में अपग्रेड किया गया है। इससे लोको पायलटों को काफी पहले से और अधिक स्पष्ट संकेत प्राप्त होंगे, जिससे ट्रेन नियंत्रण में आसानी होगी।

-समपार फाटकों की उन्नत इंटरलॉकिंग: कुल 06 समपार फाटकों (एलसी गेट नं. 224, 223, 222, 221, 220 एवं 216 ‘सी’) को एबीएस प्रणाली के अनुरूप इंटरलॉक किया गया है। इससे रेल और सड़क दोनों उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित हुई है।

पीआरओ ने बताया कि इस सम्पूर्ण परियोजना का जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन कानपुर प्रोजेक्ट इकाई द्वारा किया गया। इसमें उप मुख्य सिग्नल एवं दूरसंचार अभियंता (प्रोजेक्ट कानपुर) महेंद्र सिंह एवं निवेदिता त्रिपाठी का उत्कृष्ट योगदान एवं महत्वपूर्ण भूमिका रही।

उन्नत सिग्नलिंग प्रणाली के माध्यम से ट्रेन संचालन अब पहले से अधिक सुरक्षित, तीव्र एवं विश्वसनीय बन गया है। यह पहल भारतीय रेल के 'सुरक्षित, समयबद्ध एवं विश्वसनीय परिवहन' के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / विद्याकांत मिश्र