मशरूम उत्पादन से युवाओं और किसानों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे : डॉ. खलील खान

 


कानपुर, 27 सितंबर (हि.स.)। मशरूम उत्पादन की तकनीक और इससे जुड़े रोजगार के अवसरों की जानकारी प्रशिक्षणार्थियों को दी गई, ताकि वे इसका लाभ उठाकर स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ सकें। यह बातें रविवार को चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी (सीएसए) विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी डॉ. खलील खान ने छह दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन पर कही।

सीएसए के पादप रोग विज्ञान विभाग की ओर से आयोजित छह दिवसीय मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन हो गया। प्रशिक्षण में प्रदेश के 92 प्रशिक्षणार्थियों ने हिस्सा लिया, जिसमें नौ महिलाएं भी शामिल रहीं।

छह दिनों तक चले प्रशिक्षण में विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने मशरूम उत्पादन से जुड़ी विभिन्न तकनीकों की जानकारी दी। विभागाध्यक्ष डॉ. मुकेश श्रीवास्तव, खाद्य विज्ञान एवं पोषण विभाग की प्राध्यापक डॉ. विनीता सिंह, डॉ. सेंथिलकुमार एस., डॉ. शिवानी चौधरी और कीट विज्ञान विभाग की डॉ. नाहिदा ए. खान ने प्रशिक्षणार्थियों को मशरूम का इतिहास, श्वेत बटन मशरूम और ढिंगरी मशरूम के उत्पादन की तकनीक समझाई।

इसके साथ ही मशरूम से बनने वाले मूल्यवर्धित उत्पाद और व्यंजन तैयार करने, फसलों में होने वाली बीमारियों व कीटों से बचाव, मशरूम फार्म की संरचना और खेती के दौरान आने वाली समस्याओं के समाधान की जानकारी दी गई।

जिला उद्यान अधिकारी उमेश चंद्र, भारत एग्रीटेक के संस्थापक एवं निदेशक डॉ. धनंजय सिंह और एमएसएमई से जुड़े शिवम त्रिपाठी ने मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में संचालित सरकारी योजनाओं, सब्सिडी और ऋण की जानकारी दी। प्रशिक्षणार्थियों को प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिकीकरण योजना, स्पॉन उत्पादन और मशरूम फार्म तैयार करने के संबंध में भी बताया गया। प्रशिक्षण के अंतिम दिन प्रशिक्षणार्थियों की शंकाओं का समाधान किया गया। मीडिया प्रभारी डॉ. खलील खान ने बताया कि सभी प्रतिभागियों को प्रशिक्षण साहित्य और प्रमाण-पत्र भी दिए गए।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप