मर्म विज्ञान में शरीर के महत्वपूर्ण बिंदुओं की जानकारी उपचार में उपयोगी : डॉ. नवीन चंद्र जोशी
कानपुर, 02 नवंबर (हि.स.)। आयुर्वेद में मर्म विज्ञान का विशेष महत्व है। शरीर के महत्वपूर्ण मर्म बिंदुओं, उनकी संरचना और कार्यप्रणाली की जानकारी उपचार की दृष्टि से उपयोगी होती है। विद्यार्थियों को पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान के साथ उसके व्यावहारिक पक्ष को भी समझना चाहिए। यह बातें सोमवार को छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के स्कूल ऑफ हेल्थ साइंसेस में आयोजित शैक्षणिक सत्र में पंचकर्म विशेषज्ञ डॉ. नवीन चंद्र जोशी ने कहीं।
उन्होंने विद्यार्थियों को आयुर्वेद की प्राचीन चिकित्सा पद्धति, पंचकर्म और मर्म विज्ञान के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। देहरादून से आए डॉ. जोशी ने विधुर मर्म, कर्ण मर्म सहित शरीर के विभिन्न मर्म बिंदुओं की स्थिति, संरचना और उपचार में उनकी उपयोगिता समझाई। उन्होंने बताया कि शरीर के महत्वपूर्ण बिंदुओं का ज्ञान आयुर्वेदिक चिकित्सा में विशेष भूमिका निभाता है।
सत्र में डॉ. वंदना पाठक ने भी मर्म विज्ञान के महत्व पर प्रकाश डाला। विशेषज्ञों ने फेशियल नर्व यानी चेहरे की तंत्रिका की संरचना और कार्यप्रणाली के साथ खोपड़ी की विभिन्न शारीरिक संरचनाओं की जानकारी दी। विद्यार्थियों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ मर्म बिंदुओं के व्यावहारिक उपयोग के बारे में भी बताया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ वरिष्ठ आयुर्वेदाचार्या डॉ. वंदना पाठक, संस्थान के निदेशक प्रो. मुनीश रस्तोगी और एसोसिएट डीन (प्रशासन) प्रो. दिग्विजय शर्मा सहित अन्य शिक्षकों ने किया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों और आधुनिक स्वास्थ्य विज्ञान के बीच समन्वय पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम का संचालन संस्थान की सहायक निदेशिका डॉ. हिना वैश्य ने किया। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय चिकित्सा परंपरा के वैज्ञानिक और व्यावहारिक पक्षों से परिचित कराना था। इस दौरान विद्यार्थियों को आयुर्वेद के ज्ञान और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के साथ उसके समन्वय की संभावनाओं को समझने का अवसर मिला।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप