बांदा में 48 डिग्री पार तापमान की पड़ताल करने पहुंचा वैज्ञानिक दल
बांदा, 18 जून (हि.स.)। उत्तर प्रदेश में बुंदेलखंड के बांदा जिले में लगातार बढ़ रही भीषण गर्मी और 48 डिग्री सेल्सियस से अधिक पहुंच रहे तापमान को लेकर शासन ने गंभीर पहल की है। जिलाधिकारी अमित आसेरी के अनुरोध पर शासन स्तर से छह वैज्ञानिकों की एक टीम गुरुवार काे बांदा पहुंची है। यह टीम आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों और उपग्रहों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर यह पता लगाएगी कि जिले में लू और भीषण गर्मी का प्रभाव अन्य क्षेत्रों की तुलना में अधिक क्यों देखने को मिलता है।
वैज्ञानिकों की टीम जिले के विभिन्न क्षेत्रों का विस्तृत सर्वेक्षण करेगी। अध्ययन के दौरान यह जांचा जाएगा कि किन स्थानों पर भूमि सबसे अधिक गर्म हो रही है, किन परिस्थितियों के कारण तापमान में लगातार वृद्धि हो रही है और किन वजहों से गर्म हवाओं का असर अधिक महसूस किया जाता है।
अध्ययन में भूमि की सतह के तापमान का विशेष रूप से आकलन किया जाएगा। उपग्रहों से प्राप्त आंकड़ों के माध्यम से यह पता लगाया जाएगा कि जिले के कौन-कौन से क्षेत्र अत्यधिक गर्म हो रहे हैं। इसके साथ ही हरियाली और वन क्षेत्र की वर्तमान स्थिति का भी विश्लेषण किया जाएगा। वैज्ञानिक यह जानने का प्रयास करेंगे कि पेड़ों की संख्या में कमी, वन क्षेत्र में बदलाव और हरित आवरण घटने का तापमान पर कितना प्रभाव पड़ रहा है।
टीम जल स्रोतों की स्थिति का भी अध्ययन करेगी। तालाबों, नदियों, जलभराव वाले क्षेत्रों और भूजल स्तर का परीक्षण कर यह समझने की कोशिश की जाएगी कि नमी में कमी का गर्मी की तीव्रता से कितना संबंध है। इसके अलावा बुंदेलखंड की चट्टानी भूमि, खुले भूभाग, कम आर्द्रता और गर्म हवाओं की दिशा जैसे भौगोलिक कारकों की भी वैज्ञानिक ढंग से जांच की जाएगी।
वैज्ञानिक दल यह भी देखेगा कि सड़कों, पक्के निर्माणों, धूल, बढ़ती आबादी और अन्य मानवीय गतिविधियों का तापमान पर कितना प्रभाव पड़ रहा है। यह पता लगाया जाएगा कि क्या इन कारणों से ऐसे क्षेत्र बन रहे हैं जहां आसपास की तुलना में अधिक गर्मी महसूस होती है।
अध्ययन के दौरान पुराने तापमान अभिलेखों, वर्तमान मौसम संबंधी आंकड़ों और उपग्रहों से प्राप्त जानकारी का तुलनात्मक विश्लेषण किया जाएगा। इसके आधार पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि बांदा में तापमान वृद्धि केवल मौसमी कारणों से हो रही है या स्थानीय परिस्थितियां भी इसे अधिक गंभीर बना रही हैं।
गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में बांदा जिले का तापमान कई बार 48 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। भीषण गर्मी और लू का प्रभाव आम जनजीवन पर लगातार पड़ रहा है। ऐसे में इस वैज्ञानिक अध्ययन को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अध्ययन रिपोर्ट सामने आने के बाद जिला प्रशासन को गर्मी से बचाव की प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने, अधिक पौधरोपण कराने, जल संरक्षण को बढ़ावा देने और छायादार क्षेत्रों के विकास जैसी योजनाओं को बेहतर ढंग से लागू करने में सहायता मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि बांदा में किया जा रहा यह अध्ययन भविष्य में पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए एक उपTयोगी मार्गदर्शक मॉडल साबित हो सकता है। यह जानकारी जिला अधिकारी अमित आसेरी ने गुरुवार को दी।
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हिन्दुस्थान समाचार / अनिल सिंह