नेपाल में हुई त्रासदी पर चीन सरकार दे मुआवजा : शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देव तीर्थ

 


मथुरा, 30 अगस्त (हि.स.)। पूर्वाम्नाय गोवर्धन मठ पुरी पीठ के शंकराचार्य स्वामी श्री अधोक्षजानंद देव तीर्थ जी महाराज ने मथुरा में रविवार काे नेपाल में आई भयानक प्राकृतिक आपदा पर गहरा शोक और चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि नेपाल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से गोवर्धन पीठ का विशेष संरक्षित एवं धर्म-शासित अधीनस्थ क्षेत्र है। इस संकट की घड़ी में गोवर्धन मठ पीड़ित नागरिकों और श्रद्धालुओं के साथ पूरी मजबूती से खड़ा है।

मृतकों की शांति और लापता लोगों के लिए महायज्ञ

शंकराचार्य जी ने आपदा में असमय काल-ग्रसित हुए लोगों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए ईश्वर से उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान देने की याचना की। साथ ही, देश-विदेश के हजारों लापता श्रद्धालुओं, पर्यटकों और स्थानीय निवासियों की सुरक्षित वापसी के लिए मां भगवती से प्रार्थना की। उन्होंने बताया कि मृत आत्माओं की शांति और लापता लोगों के सकुशल मिलने की कामना को लेकर गोवर्धन पीठ में विशेष महायज्ञ का आयोजन किया गया है।

नेपाल में आकलन से अधिक नुकसान, तत्काल सहायता की अपील

आपदा की विभीषिका पर प्रकाश डालते हुए शंकराचार्य जी ने कहा कि नेपाल में हुआ नुकसान आकलन से कहीं ज्यादा है। हजारों लोग बेघर हो गए हैं और लाखों लोग प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि भारत और नेपाल सरकार के विभिन्न अंग जैसे पुलिस, अर्द्धसैनिक बल, सेना और राहतकर्मी पूरी तत्परता से खोज व बचाव कार्य में लगे हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की है कि इन सभी राहतकर्मियों को अपने मिशन में पूर्ण सफलता मिलेगी। उन्होंने भारत सरकार एवं अन्य अंतरराष्ट्रीय सरकारों से अपील की कि वहां तत्काल प्रभाव से अधिक से अधिक राहत सामग्री और आवश्यक सहायता भेजी जाए।

चीन की लापरवाही पर सवाल, क्षतिपूर्ति और घर बनवाने की मांग

चीन की भूमिका पर कड़ा रुख अपनाते हुए शंकराचार्य जी ने कहा कि चीन ने जिस प्रकार दूसरी बार आपदा का संकेत दिया, यदि पहली बार भी ऐसी ही सूचना समय पर दे दी होती तो इतने बड़े महासंकट और तबाही से बचा जा सकता था। उन्होंने चीन सरकार से मांग की कि वह नेपाल में हुए नुकसान की पूरी क्षतिपूर्ति (मुआवजा) करे और बेघर हुए लोगों के लिए नए मकान बनवाए। उन्होंने कहा कि चीन सीमाओं पर बांध संबंधी कोई भी कार्य शुरू करने से पहले पड़ोसी देशों की सुरक्षा का ध्यान रखे और उनसे सलाह-मशविरा करे।

भारत-चीन संबंधों पर टिप्पणी

शंकराचार्य जी ने कहा कि चीन तेजी से महाशक्ति के रूप में उभर रहा है, इसलिए उसका दायित्व भी अधिक बढ़ जाता है। भारत और चीन के रिश्तों में हो रहे सुधार का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि यह एक सकारात्मक पहल है, लेकिन इसके साथ ही पड़ोसी देशों के हितों व सुरक्षा का ध्यान रखा जाना अत्यंत आवश्यक है।

हिन्दुस्थान समाचार / महेश कुमार