निरंतर सीखना और नवाचार ही बेहतर रोगी सेवा की आधारशिला : प्रो. सीमा द्विवेदी
कानपुर, 14 सितंबर (हि.स.)। चिकित्सा शिक्षा में निरंतर सीखना, आपसी सहयोग और नवीन शिक्षण विधियों को अपनाना बेहतर शिक्षक, कुशल चिकित्सक और गुणवत्तापूर्ण रोगी सेवा की आधारशिला है। बदलते चिकित्सा क्षेत्र में शिक्षकों और चिकित्सकों को नई तकनीकों व शिक्षण पद्धतियों से लगातार जुड़ना चाहिए। यह बातें सोमवार को गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज (जीएसवीएम) मेडिकल कॉलेज के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) सीमा द्विवेदी ने सोमवार को आयोजित शैक्षणिक सेमिनार के दौरान कहीं।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की ओर से न्यू एसआईएफपीएसए में “एसीएमई इन ओबीजी- लर्निंग टुडे फॉर बेटर केयर टुमॉरो” विषय पर सेमिनार आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य चिकित्सा शिक्षा में आधुनिक शिक्षण विधियों को बढ़ावा देना और बेहतर प्रशिक्षण के माध्यम से रोगियों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराना था।
सेमिनार में डॉ. पाविका लाल ने “रोल ऑफ एसीएमई इन मेडिकल एजुकेशन” विषय पर जानकारी देते हुए आधुनिक चिकित्सा शिक्षा में उन्नत प्रशिक्षण की उपयोगिता बताई। उन्होंने चिकित्सा शिक्षकों के प्रशिक्षण, कौशल विकास और बदलती शिक्षण पद्धतियों को अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
डॉ. शैली अग्रवाल ने “की टेकअवेज फ्रॉम एसीएमई ट्रेनिंग” विषय पर प्रशिक्षण के दौरान मिली प्रमुख सीख और उनके व्यावहारिक उपयोग की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के माध्यम से शिक्षण को अधिक प्रभावी और विद्यार्थियों की जरूरतों के अनुरूप बनाया जा सकता है।
वहीं डॉ. रेनू गुप्ता ने फैकल्टी सदस्यों और रेजिडेंट चिकित्सकों को एसएनएपीपीएस मॉडल से परिचित कराते हुए क्लिनिकल रीजनिंग और केस आधारित शिक्षण में इसकी उपयोगिता समझाई। इस दौरान प्रतिभागियों ने आधुनिक चिकित्सा शिक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा भी की।
कार्यक्रम का आयोजन प्रो. (डॉ.) सीमा द्विवेदी के निर्देशन में किया गया। डॉ. नीना गुप्ता और डॉ. बंदना शर्मा ने चेयरपर्सन के रूप में कार्यक्रम का मार्गदर्शन किया। सेमिनार में विभाग के फैकल्टी सदस्यों और रेजिडेंट चिकित्सकों ने सक्रिय सहभागिता की।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप