धरती की प्यास बुझेगी तभी जीवन सुरक्षित होगा : डॉ अर्जुन पाण्डेय

 


अमेठी, 11 मई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के अमेठी जनपद में जल बिरादरी एवं शिव प्रताप इंटर कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में कालेज परिसर स्थित विवेकानन्द सभागार में 'प्यासी धरती' विषय पर साेमवार काे संवाद गोष्ठी का आयाेजन किया गया। गाेष्ठी का शुभारंभ अतिथियों ने मां सरस्वती के चित्र की पूजा अर्चना एवं माल्यार्पण तथा रीतिका पाण्डेय की वाणी वंदना से हुआ। कार्यक्रम में जल दोहन को लेकर पर्यावरणीय चिंता जाहिर करते हुए गहन विचार विमर्श किया गया। वक्ताओं ने इसके होने वाले दुष्प्रभाव से अवगत कराते हुए जागरूक रहने का आह्वान किया।

गोष्ठी में मुख्य वक्ता अध्यक्ष जल बिरादरी पर्यावरणविद् डॉ अर्जुन पाण्डेय ने कहा कि धरती के मौसम का मिजाज तेजी से बदलने से ऋतुओं का अता-पता नहीं है। भूतल की अधिकांश नदियां सूखी और पोखर खाली पड़े हैं। धरती प्यासी है। फलत: धरती पर बुखार तेजी के साथ बढ़ा है। हिमानियां तेजी के साथ पिघल रही हैं। पहाड़ दरक रहे हैं। पृथ्वी का रक्षा कवच ओज़ोन परत में अंटार्कटिका से बड़ा छिद्र बन जाने से पराबैंगनी किरणों के अत्यधिक भूताप से पृथ्वी झुलस रही है। धरती का पेट निरंतर खाली होता जा रहा है। जीवन्त ग्रह पृथ्वी केपटाउन न बने। धरती की प्यास बुझेगी तभी जीवन सुरक्षित होगा। लोभ-लालच से बचें। पृथ्वी की प्यास बुझाना मानव की नैतिक जिम्मेदारी है।

संवाद गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य दिग्विजय सिंह ने कहा कि पश्चिमी देशों से प्रभावित लोभी मानव क्षिति, जल, पावक, गगन और समीर आदि पंचभूतों को नष्ट करने पर तुला है, जो चिंता का विषय है। प्रकृति प्रेम एवं पारिस्थितिक तंत्र ज्ञान समाधान बन सकता है।

मुख्य अतिथि प्रकृति प्रेमी मोहम्मद शब्बीर अहमद सूरी ने अपने उद्बोधन में कहा कि धरती पर मरुस्थल का बढ़ना चिंता का विषय है। जल बिनु जीवन कहां ? हरियाली धरती का श्रृंगार मानकर चौमासे में होने वर्षा के जल से धरती का पेट भर के धरती की प्यास बुझाया जा सकता है।

विशिष्ट अतिथि कैलाश नाथ शर्मा ने कहा कि धरती वीरान न बने इसके लिए पुरानी पीढ़ी के रास्ते पर चल कर समाज के साथ युवाओं को जागरूक करने की जरूरत है। आज की इस संवाद गोष्ठी में मोहम्मद शहजाद, रीतिका पाण्डेय, प्रगति यादव,वंदना एवं कृति मौर्या ने भी अपने विचार रखे, जिसका समाधान मुख्य वक्ता द्वारा किया गया।

अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए डॉ रमेश कुमार शुक्ल ने कहा की यदि प्रकृति से उपहार स्वरूप प्राप्त वस्तुएं अपने अपने क्षेत्र में यथावत क्रियाशील रहेंगी। इससे न केवल उन्हें संरक्षण मिलेगा बल्कि जीव-जगत स्वयं सुरक्षित रहेगा। संवाद गोष्ठी का संचालन जगदम्बा तिवारी 'मधुर' ने किया।

गोष्ठी में आभार सिंह, अंशिका यादव, खुशी, सौम्या, शिवाकांत, हिमांशु, दीपांशु एवं सत्यं आदि सैकड़ों छात्र-छात्राएं शामिल रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / लोकेश त्रिपाठी