तपोभूमि चित्रकूट के पंचमुखी मड़फ़ा महादेव के दर्शन मात्र से मिलती है पुनर्जन्म से मुक्ति

 


-ढाई सौ मीटर ऊंची मड़फ़ा पहाड़ी पर स्थित है भगवान शिव का पौराणिक मंदिर

-प्रति वर्ष दर्शन के लिए लगता है लाखों शिवभक्तों का जमावड़ा

चित्रकूट, 13 मई (हि.स.)।उत्तर प्रदेश का चित्रकूट पौराणिक तीर्थ के रूप में विख्यात है जहां भगवान श्रीराम की तपोभूमि और इसके गर्भ में अनेक रहस्मयी स्थल विराजमान हैं। धर्म नगरी के भरतकूप क्षेत्र में घने जंगलों के बीच करीब ढाई सौ मीटर ऊंची पहाड़ी पर स्थित मड़फ़ा में आदि ऋषि मांडव्य का आश्रम है। इस प्राचीन आश्रम में नृत्यमुद्रा में विराजमान पंचमुखी भगवान शिव की महिमा का बखान वेदों और पुराणों में भी मिलता है। इस दिव्य धाम के बारे में मान्यता है कि भगवान शिव की पूजा और आराधना करने से पुनर्जन्म से मुक्ति मिलती है।

वनवास काल में साढ़े ग्यारह साल तक भगवान श्रीराम की तपोभूमि रही चित्रकूट विश्व के अनादि, अचल और ऐतिहासिक पावन तीर्थाे में से एक है। इस प्राचीन धर्मस्थली में स्वयं सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा समेत अगस्त्य, अत्रि, बाल्मीकि आदि प्रख्यात ऋषि-मुनियों ने तपस्या की है। इसी वजह से ब्रह्मांड के सबसे श्रेष्ठ स्थल के रूप में चित्रकूट का नाम लिया जाता है। लगभग 84 कोस में फैले चित्रकूट में विविध प्रकार के शिखर (कूट) स्थित है। इसमें से एक भरतकूप क्षेत्र में घने जंगलों के बीच करीब ढाई सौ मीटर ऊंची पहाड़ी पर स्थित मड़फा भी है। इसी पहाड़ पर आदि ऋषि मांडव्य जी का आश्रम है। इस प्राचीन आश्रम में भगवान शंकर अपने पंचमुखी रूप में विद्यमान हैं। नृत्यमुद्रा में विराजमान पंचमुखी भगवान शिव की महिमा का बखान वेदों और पुराणों में भी मिलता है। घनघोर जंगल में स्थित इस शिवालय में उपासना करने से जहाँ लोगों के मन की मुरादें पूरी होती हैं। वही पुनर्जन्म से मुक्ति मिलने का भी उल्लेख है। इस दिव्य स्नान को लेकर ऐसी मान्यता है कि यहां पर ऋषि मांडव्य ने तपस्या की थी। इसी तपस्थली पर महाराज दुष्यंत की पत्नी शकुंतला ने पुत्र भरत को जन्म दिया था। इसी तालाब के पास चंदेलकालीन वैभवशाली नगर के ध्वंसावशेष भी देखे जा सकते हैं। जैन धर्म के प्रर्वतक आदिनाथ के भी यहां पर आने की बात कही जाती है। महाशिवरात्रि व सावन के साथ -साथ हर सोमवार को यहां सदियों से मेला लगता चला आ रहा है। धार्मिक, ऐतिहासिक और पौराणिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस प्राचीन धरोहर को केंद्रीय पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित किया गया है।

चित्रकूट के सुप्रसिद्ध संत दिव्य जीवन दास, मदन गोपाल दास महराज,राम हृदयदास महाराज, आचार्य नवलेश दीक्षित एवं डॉ. रामनारायण त्रिपाठी मड़फा धाम की महिमा का बखान करते हुए बताते हैं कि देवराज इंद्र ने वेदवती नाम की अपूर्व सुंदरी अप्सरा को कोढ़ (कुष्ठ) होने का शाप दिया था। शापग्रस्त अप्सरा के अनुनय-विनय करने पर इंद्र ने माण्डव ऋषि के आश्रम में स्थित न्यग्रोध कुंड में स्नान कर वहां विराजमान पंचमुखी भगवान शिव की उपासना से शापमुक्त होने का मार्ग बताया था। आज भी देश भर से लोग कुष्ठ निवारण के लिए यहां आते हैं। यहां स्थापित पंचमुखी शिव के दर्शन और उपासना करने से पुनर्जन्म से मुक्ति मिलने की मान्यता है।

चित्रकूट के जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार प्रभु श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट के धार्मिक व पौराणिक तीर्थ स्थलों के पर्यटन विकास के प्रति संकल्पित है। उन्होने बताया कि चित्रकूट के सभी पौराणिक स्थलों के विकास के लिए कार्य हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि मड़फा भगवान शिव का प्राचीन धाम है। इसके पर्यटन विकास की विस्तृत कार्य योजना बनाकर शासन को भेजने के संयुक्त निदेशक पर्यटन को निर्देशित किया गया है।

हिन्दुस्थान समाचार / रतन पटेल