ट्रिपल आईटीए के वैज्ञानिकों को मिला बड़ा पेटेंट ‘खर्चे की जासूस’

 


-डिवाइस अब चेहरे पढ़कर रोकेगी आपकी आवेग खरीददारी

-डिजिटल इंडिया का भविष्य अब सिर्फ स्मार्ट नहीं, थोड़ा जजमेंटल भीप्रयागराज, 20 मार्च (हि.स)। डिजिटल पेमेंट की दुनिया में तहलका मचा देने वाली खबर आई है। इलाहाबाद के भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपल आईटीए) के वैज्ञानिकों को भारतीय पेटेंट कार्यालय से पेटेंट मिल गया है। इस डिवाइस का नाम है ‘स्मार्ट डिवाइस टू मॉनिटर द ई-वॉलेट यूटिलाइजेशन एंड द स्पेंडिंग बिहेवियर ऑफ द यूजर’।

यह जानकारी ट्रिपल आईटीए, इलाहाबाद के पीआरओ डॉ पंकज मिश्र ने शुक्रवार को देते हुए बताया कि इस डिवाइस को बनाने वाले प्रो. रंजीत सिंह (ट्रिपल आईटीए), रिसर्च स्कॉलर काजोल (ट्रिपल आईटीए), प्रो. दिब्योज्योति भट्टाचार्जी (असम यूनिवर्सिटी) और सुमैया गौहर (अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी) हैं। यह कॉम्पैक्ट डिवाइस किसी भी मोबाइल या कम्प्यूटर स्क्रीन पर क्लिप लगाकर चिपक जाता है और कैमरा, माइक्रोफोन, एक्सेलरोमीटर तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से यूजर का चेहरा और बॉडी लैंग्वेज पढ़ता है। यह हर यूपीआई ट्रांजेक्शन को ट्रैक करता है, चाहे फोन पे, गूगल पे, पेटीएम या व्हाट्सएप पे हो। अगर यूजर की भौंहें चढ़ती हैं या मुंह बनाता है तो तुरंत अलर्ट भेजता है कि ‘भाई, सोच लो!’ डिवाइस महीने का पूरा खर्च रिपोर्ट तैयार करता है, लिमिट क्रॉस होने पर चेतावनी देता है और यूजर की आदतों के हिसाब से सबसे अच्छाई-वॉलेट भी सुझाता है।

उन्होंने बताया कि इसके अलावा डिवाइस खुद यूजर से सर्वे करता है कि कौन सा वॉलेट क्यों अनइंस्टॉल किया गया। यह डेटा यूजर की सहमति लेकर वॉलेट कम्पनियों को भेजता है ताकि वे अपनी ऐप में सुधार कर सकें। प्रो. रंजीत सिंह ने हंसते हुए कहा, “भारतीय अब ई-वॉलेट से इतना खर्च करते हैं कि माँ भी नहीं रोक पाती। हमने वो डिवाइस बना दिया है जो माँ की जगह बैठकर कहता है - ‘बेटा, मैगी मत खरीदो रात में!’”

डॉ पंकज मिश्र ने बताया कि डिवाइस की सुरक्षा भी लोहे जैसी है। इसमें फिंगर प्रिंट और फेस रिकग्निशन लॉक, रिमोट वाइप सिस्टम, पानी और झटके से बचाव वाली बॉडी तथा एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन है। भारत में यूपीआई ट्रांजेक्शन हर महीने 20 लाख करोड़ रुपये पार कर चुका है और आवेग खरीददारी की समस्या बहुत बड़ी है। यह डिवाइस यूजर्स को खर्च पर कंट्रोल देगा और फिनटेक कम्पनियों को असली फीडबैक देगा। डिजिटल इंडिया का भविष्य अब सिर्फ स्मार्ट नहीं, थोड़ा जजमेंटल भी हो गया है। अगली यूपीआई पेमेंट पर शायद आपका फोन ही कहे - “भाई, सोच लो!”

हिन्दुस्थान समाचार / विद्याकांत मिश्र