कृषि विविधीकरण से किसानों की आय बढ़ेगी’ : डॉ. वी.के. त्रिपाठी
कानपुर, 23 फरवरी (हि.स.)। कृषि विविधीकरण अपनाकर पुष्पोत्पादन और सब्जी उत्पादन के माध्यम से किसान अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं। बागवानी में अंतः फसली खेती के तहत हल्दी, ड्रैगनफ्रूट, रसभरी के साथ गेंदा और ग्लैडियोलस जैसी फसलों से अतिरिक्त आमदनी संभव है। साथ ही जैविक तरीकों को अपनाकर लागत घटाई जा सकती है। यह बातें सोमवार को चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) के अंतर्गत कृषि विज्ञान केंद्र में आयोजित वैज्ञानिक सलाहकार समिति की समीक्षा बैठक में निदेशक प्रसार डॉ. वी.के. त्रिपाठी ने कही।
प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति के निर्देशानुसार सीएसए के कुलपति के मार्गदर्शन में कृषि विज्ञान केंद्र परिसर में वैज्ञानिक सलाहकार समिति की समीक्षा बैठक संपन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता निदेशक प्रसार डॉ. वी.के. त्रिपाठी ने की। उन्होंने कृषकों से सब्जी उत्पादन में रासायनिक कीटनाशकों के स्थान पर जैविक कीटनाशक, जैविक फफूंदनाशक, जीवामृत, घनजीवामृत, नीमास्त्र और पंचगव्य जैसे जैविक उत्पादों के उपयोग की सलाह दी। इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी और उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार होगा।
केंद्राध्यक्ष डॉ. के.के. सिंह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए वर्ष 2025 में केंद्र द्वारा आयोजित कार्यक्रमों की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसके बाद केंद्र के वैज्ञानिकों ने विषयवार प्रगति आख्या 2025 एवं कार्ययोजना 2026 का प्रस्तुतीकरण किया। कृषि विज्ञान केंद्र पल्टीखेड़ा के वैज्ञानिकों ने भी अपनी उपलब्धियां और आगामी कार्ययोजना साझा की।
बैठक में उप कृषि निदेशक ने गुणवत्तायुक्त उत्पादन पर जोर दिया। नाबार्ड के प्रतिनिधि ने एफपीओ के माध्यम से विपणन व आय वृद्धि की बात कही। इफको के प्रतिनिधि ने यूरिया की खपत घटाकर जैव उर्वरकों के प्रयोग की सलाह दी। उप पशु चिकित्साधिकारी ने बैकयार्ड पालन से आय बढ़ाने के उपाय बताए।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप