उप्र में मलेरिया के मरीजों की संख्या में आई सात गुना की गिरावट
तुरंत जांच व इलाज की रणनीति का मलेरिया उन्मूलन में दिख रहा असर
लखनऊ, 25 अप्रैल (हि.स.)। उत्तर प्रदेश को मच्छरजनित बीमारी मलेरिया से वर्ष 2030 तक उन्मूलन करने के लक्ष्य के मद्देनजर प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं। बीते चार-पांच सालों में प्रदेश में मलेरिया के मरीजों की संख्या में तकरीबन सात गुना की गिरावट आई है जो उन्मूलन की दिशा में शुभ संकेत हैं। यह जानकारी संयुक्त निदेशक डॉ. विकास सिंघल ने शनिवार को दी।
संयुक्त निदेशक के अनुसार समय पर पहचान और उपचार न मिलने पर यह बीमारी गंभीर रूप ले सकती है, लेकिन उचित जांच और समयबद्ध उपचार से इसे पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है। इसलिए मलेरिया नियंत्रण का मूल आधार समय पर पहचान, सटीक जांच और पूर्ण उपचार है।
डॉ. विकास सिंघल ने बताया कि वर्ष 2019 में जहां मलेरिया के 92,000 से अधिक मामले सामने आए थे, वहीं वर्ष 2025 तक यह संख्या घटकर 14500 के आसपास रह गई है। उन्होंने बताया कि मलेरिया नियंत्रण में सामुदायिक सहभागिता अत्यंत जरूरी है। जलभराव को रोकना, कूलर और अन्य जल स्रोतों की नियमित सफाई, मच्छरदानी का उपयोग और व्यक्तिगत सुरक्षा उपाय अपनाना संक्रमण के जोखिम को कम करने में सहायक है।
संयुक्त निदेशक डॉ. विकास सिंघल ने बताया कि मलेरिया नियंत्रण के लिए एक दिन के भीतर केस की सूचना, तीन दिन के भीतर जांच और सात दिन के भीतर फोकस क्षेत्र में आवश्यक नियंत्रण उपाय लागू किए जाते हैं। रणनीति का दूसरा अहम स्तंभ है “टेस्ट, ट्रीट व ट्रैक” अर्थात प्रत्येक संदिग्ध मरीज की जांच, पुष्ट मामलों का उपचार और उनकी निगरानी। आशा, एएनएम और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी अब दूरदराज के क्षेत्रों में भी त्वरित जांच सुनिश्चित कर रहे हैं।
रणनीति का तीसरा स्तंभ मलेरिया की रोकथाम को सुदृढ़ करना है, जिसके अंतर्गत इंटीग्रेटेड वेक्टर मैनेजमेंट अपनाया जा रहा है। इसमें मच्छरों की प्रजातियों, उनके प्रजनन स्थलों और कीटनाशक प्रतिरोध की निगरानी की जाती है तथा लार्वा नियंत्रण जैसे उपायों को क्षेत्र विशेष के अनुसार लागू किया जाता है। इससे संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ने में मदद मिलती है।
उन्होंने बताया कि इसी रणनीति को लागू कराकर प्रदेश में मलेरिया की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन