आईआईटी कानपुर में 29 अक्टूबर से सजेगा साहित्य महोत्सव ‘अक्षर’, कवि सम्मेलन और मुशायरा होगा आकर्षण
कानपुर, 28 अक्टूबर (हि.स.)। भारतीय भाषाओं और साहित्यिक परंपराओं को बढ़ावा देने के लिए आईआईटी कानपुर में 29 से 31 अक्टूबर तक साहित्य महोत्सव ‘अक्षर’ का आयोजन किया जाएगा। तीन दिवसीय महोत्सव में प्रख्यात कवियों, अभिनेताओं, संगीतकारों और कलाकारों की प्रस्तुतियों के साथ साहित्य, भाषा और तकनीक से जुड़े विषयों पर परिचर्चाएं होंगी। यह जानकारी महोत्सव की ओर से जारी विज्ञप्ति में दी गई।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर में ‘अक्षर’ का पांचवां संस्करण आयोजित होगा। हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं के प्रोत्साहन के लिए स्थापित शिवानी केंद्र और राजभाषा प्रकोष्ठ की ओर से आयोजित इस महोत्सव का उद्देश्य भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देना और देश की विविध सांस्कृतिक परंपराओं से लोगों को जोड़ना है।
वर्ष 2022 में शुरू हुए ‘अक्षर’ के पिछले चार संस्करणों में 400 से अधिक कलाकार हिस्सा ले चुके हैं। इनमें कवि, लेखक, अभिनेता और संगीतकार शामिल रहे हैं। पिछले आयोजनों में डॉ. पुष्पेश पंत, डॉ. मृणाल पांडे, आर. बाल्की, पद्मश्री डॉ. सोमा घोष, वसीम बरेलवी, मेघना मलिक और मोहम्मद वकील जैसी हस्तियां शामिल हो चुकी हैं। महोत्सव में पुस्तक मेले का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें शास्त्रीय और समकालीन साहित्य की पुस्तकें प्रदर्शित होंगी।
निराला की साहित्यिक यात्रा से होगी शुरुआत
महोत्सव के पहले दिन 29 अक्टूबर को कवि एवं नाटककार व्योमेश शुक्ल सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ के साहित्यिक योगदान पर ‘निराला की निराली बातें’ शीर्षक से प्रस्तुति देंगे। बच्चों और वयस्कों के लिए खुले मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने के सत्र भी होंगे। शाम को पद्मश्री कालूराम बामनिया और उनके दल की ओर से कबीर संगीत प्रस्तुत किया जाएगा। इसके बाद निजामी ब्रदर्स कव्वाली पेश करेंगे।
29 और 30 अक्टूबर के कार्यक्रम आईआईटी कानपुर के आउटरीच ऑडिटोरियम में दोपहर तीन से रात नौ बजे तक होंगे।
अभिनय, संगीत और रंगमंच की प्रस्तुतियां
30 अक्टूबर को ‘किरदार—एक अभिनेता के भीतर का संसार’ विषय पर परिचर्चा होगी। इसमें अभिनेता अतुल श्रीवास्तव, दर्शन जरीवाला, सुचित्रा पिल्लई और डिम्पी मिश्रा हिस्सा लेंगे। सत्र का संचालन रेडियो मिर्ची की आरजे काजल करेंगी।
गीतकार समीर अंजान अपने संगीत और गीत लेखन के सफर पर विविध भारती के कलाकार यूनुस खान के साथ संवाद करेंगे। इसके अलावा प्रो. संगीता श्रीवास्तव के नेतृत्व में कथक प्रस्तुति, रूपवाणी थिएटर ग्रुप का नाटक ‘चित्रकूट’, गजल संध्या और सूफी बैंड रागधानी की प्रस्तुति होगी।
महोत्सव के अंतिम दिन 31 अक्टूबर को साहित्य और प्रौद्योगिकी के संबंधों पर परिचर्चाएं होंगी। इनमें ‘एआई के दौर में साहित्य सृजन’ और ‘तकनीकी के विकास में भाषा का योगदान’ विषय शामिल हैं। सामाजिक यथार्थ को सामने लाने में हास्य की भूमिका पर भी चर्चा की जाएगी।
समापन पर महाकवि सम्मेलन और मुशायरा आयोजित होगा। इसमें सुरेंद्र शर्मा, नवाज देवबंदी, नीलोत्पल मृणाल, पंकज चतुर्वेदी, बाबुषा कोहली और शशि श्रेया सहित हिंदी और उर्दू के प्रमुख कवि अपनी रचनाएं प्रस्तुत करेंगे। अंतिम दिन के कार्यक्रम दोपहर साढ़े तीन बजे से खुले रंगमंच पर होंगे।
महोत्सव के माध्यम से आईआईटी कानपुर विद्यार्थियों, कलाकारों और साहित्य प्रेमियों को भारतीय भाषाओं, साहित्य और कला से जुड़ने का अवसर प्रदान करेगा।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप