अवैध खनन पर सख्ती से बढ़ा प्रदेश का सरकारी खजाना
लखनऊ, 22 जुलाई (हि.स.)। प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर प्रमुखता से काम कर रही है। इसके चलते राज्य के खजाने में बढ़ोत्तरी हो रही है। उत्तर प्रदेश का भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग इसका ताजा उदाहरण बनकर सामने आया है। विभाग में योगी सरकार के 9 वर्षों में 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ है। यह सपा सरकार के कार्यकाल में महज 4,700 करोड़ रुपये तक सीमित था। वहीं योगी सरकार में विभाग ने प्रदेश में 66 अवैध खनन क्षेत्रों की पहचान कर कार्रवाई की।
उत्तर प्रदेश भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग की सचिव एवं निदेशक माला श्रीवास्तव ने बुधवार काे बताया कि यह उपलब्धि केवल राजस्व वृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि पारदर्शी नीलामी, आधुनिक तकनीक के उपयोग, अवैध खनन पर सख्ती, डिजिटल सेवाओं के विस्तार व प्रभावी निगरानी व्यवस्था के कारण संभव हो सकी है। विभाग की प्राथमिकता है कि हर स्तर पर प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था में भागीदारी बढ़ सके।
तकनीकी निगरानी से बढ़ी राजस्व बढ़ोतरी
अवैध खनन पर प्रभावी कार्यवाही के लिए निदेशालय में नई तकनीक पर आधारित पीजीआरएस प्रयोगशाला की स्थापना की गई। इस प्रयोगशाला में गूगल अर्थ की मदद से लगातार जांचकर अब तक 66 स्थानों पर अवैध खनन का पता लगाकर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की गई। इस कार्रवाई से 2.19 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ। इसके साथ अवैध खनन से जुड़े अपराधियों का नेटर्वक भी खत्म किया गया।
पारदर्शी नीलामी से बढ़ा राजस्व, पोर्टल से बढ़ी पारदर्शिता
वित्तीय वर्ष 2022-23 से अब तक प्रमुख खनिजों के 10 ब्लॉकों का कंपोजिट लाइसेंस व 3 ब्लॉकों की खनन पट्टों की सफल ई-नीलामी कर आवंटन किया गया, जिससे राजस्व के नए स्रोत विकसित हुए। इसके साथ खनिज संबंधी सेवाओं को ऑनलाइन करते हुए यूपी माइन मित्र पोर्टल विकसित किया गया। इसके माध्यम से 10 प्रकार की सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराई गईं। लाखों आवेदनों का समयबद्ध निस्तारण किया गया, जिससे पारदर्शिता और दक्षता बढ़ी है।
आईएमएसएस से अवैध परिवहन पर नियंत्रण
इंटीग्रेटेड माइनिंग सर्विलांस सिस्टम (आईएमएसएस), जियो-फेंसिंग, आएफआईडी टैग, एआई एवं आईओटी आधारित चेकगेट और ई-नोटिस प्रणाली लागू कर अवैध खनन एवं परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया गया। साथ ही खनिज परिवहन के लिए वीटीएस प्रणाली, जीपीएस आधारित वाहन निगरानी, राज्य पोर्टलों का एपीआई इंटीग्रेशन व ऑनलाइन निरीक्षण व्यवस्था लागू कर खनिज परिवहन को अधिक पारदर्शी बनाया गया।
हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन