वाराणसी के भाजपा जिलाध्यक्ष व एमएलसी हंसराज विश्वकर्मा को योगी कैबिनेट में मिली जगह
—हंसराज ने प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के साथ भाजपा का दामन भी छोड़ा,लेकिन फिर भगवा का दामन थामा तो संगठन और पदाधिकारियों में बनाई मजबूत पकड़
—जिला पंचायत चुनाव,प्रधानी चुनाव में पूरे दमखम से प्रचार कर पार्टी उम्मीदवारों को जिताया
वाराणसी,10 मई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कैबिनेट विस्तार में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)के वाराणसी जिलाध्यक्ष व एमएलसी हंसराज विश्वकर्मा को भी महत्वपूर्ण जगह मिली है। रविवार को हंसराज विश्वकर्मा ने भी मंत्री पद की शपथ ली। हंसराज के मंत्री बनते ही उनके समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर दौड़ गई। उनके कंचनपुर स्थित आवास पर समर्थकों ने एक दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी जताई। वहीं, सोशल मीडिया पर भी समर्थक और पार्टी कार्यकर्ता बधाई देते रहे। हंसराज विश्वकर्मा के उंची सियासी छलांग और भाजपा छोड़ने से लेकर पुन: जुड़ने की चर्चा भी सोशल मीडिया में होती रही।
बताते चले, हंसराज विश्वकर्मा की राजनीतिक यात्रा संघर्ष, संगठन क्षमता और पार्टी नेतृत्व के साथ मजबूत तालमेल का उदाहरण मानी जाती है। उनकी राजनीतिक सक्रियता रामजन्मभूमि आंदोलन के दौर से ही रही है। वह उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय कल्याण सिंह के करीबी माने जाते थे। जब कल्याण सिंह ने भाजपा से अलग होकर नई राजनीतिक राह चुनी, तब हंसराज विश्वकर्मा भी उनके साथ चले गए थे। हालांकि बाद में उन्होंने भाजपा में वापसी की और संगठन में सक्रिय भूमिका निभाते हुए शीर्ष नेतृत्व का विश्वास हासिल करने के साथ उनके गुडलिस्ट में भी आ गए। इसके बाद हंसराज ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और पार्टी की जिम्मेदारियों को निभाते चले गए। अपने संगठनात्मक क्षमता के कारण हंसराज विश्वकर्मा लगातार भाजपा में मजबूत होते गए। वर्ष 2010 में उन्हें भाजपा किसान मोर्चा का जिलाध्यक्ष बनाया गया। इसके बाद 2013 में जिला मंत्री तथा 2015 में जिला सदस्यता प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई। वर्ष 2016 में पहली बार वाराणसी भाजपा का जिलाध्यक्ष बनाए गए और तब से लगातार दो कार्यकाल आज तक इस पद पर बने रहे।
वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में वाराणसी की पांच सीटों पर पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ जमकर चुनाव किया। भाजपा के खाते में सीट आई तो इसका श्रेय हंसराज को भी मिला।
इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में भी पार्टी के बड़े कद्दावर नेताओं के साथ चुनाव प्रचार किया। हंसराज के संगठन शक्ति और नेतृत्व कौशल की झलक 2021 में जिला पंचायत अध्यक्ष व आठ ब्लॉकों में ब्लॉक प्रमुखों को जिताने में दिखी। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चलने की उनकी शैली और संगठन पर मजबूत पकड़ ने उन्हें पार्टी नेतृत्व के भरोसेमंद नेताओं की कतार में खड़ा किया। वर्ष 2023 में भाजपा नेतृत्व ने उन्हें विधान परिषद सदस्य बनाया और अब 2026 में उन्हें योगी सरकार में मंत्री पद देकर संगठन में उनके योगदान को बड़ा सम्मान दिया गया है। परास्नातक शिक्षित हंसराज विश्वकर्मा वर्ष 1989 में भाजपा से जुड़े थे। शुरुआती दौर में उन्हें बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने की जिम्मेदारी मिली थी। राजनीति के साथ-साथ वह सामाजिक और जातिवादी (पिछड़ी जाति) गतिविधियों से भी जुड़े रहे हैं। वह शिल्प अनुसंधान एवं विकास संस्थान, उत्तर प्रदेश तथा श्री विश्वकर्मा मंडल काशी के संरक्षक भी हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी