राजस्व वादों के निस्तारण में लापरवाही पर योगी सरकार की बड़ी कार्रवाई, 4 तहसीलदार और 1 नायब तहसीलदार निलंबित
- सीएम योगी ने हाल ही में राजस्व वादों का निस्तारण निर्धारित समयसीमा में सुनिश्चित करने के दिये थे निर्देश
- राजस्व परिषद ने निलंबित करने के साथ ही पांचों अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई भी शुरू की
लखनऊ, 3 सितंबर। योगी सरकार ने प्रदेश के राजस्व न्यायालयों में लंबित वादों के निस्तारण में लापरवाही और हीलाहवाली पर कड़ा रुख अपनाते हुए चार तहसीलदार और एक नायब तहसीलदार को निलंबित कर दिया है। सीएम योगी के निर्देश पर राजस्व परिषद ने इन पांचों को निलंबित करने के साथ अनुशासनिक कार्रवाई भी शुरू कर दी है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में प्रदेश के राजस्व न्यायालयों में लंबित वादों की स्थिति की उच्चस्तरीय समीक्षा की थी। समीक्षा के दौरान सीएम ने अधिकारियों को राजस्व वादों का निस्तारण निर्धारित समय सीमा के भीतर सुनिश्चित करने के निर्देश दिये थे। उन्होंने कहा था कि वादों के निस्तारण में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। इसी के बाद राजस्व परिषद ने बड़ी कार्रवाई की है।
तहसीलदार पवन कुमार, अतुल हर्ष, हरेराम यादव, आनन्द ओझा और नायब तहसीलदार विवेक कुमार पर गिरी गाज
राजस्व परिषद की आयुक्त एवं सचिव कंचन वर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रदेश के सभी राजस्व न्यायालयों में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा-34 के तहत दाखिल वादों की न्यायालयवार और अधिकारीवार गहन समीक्षा की गई। समीक्षा में कई अधिकारियों के स्तर पर लंबित मामलों के निस्तारण की गति संतोषजनक नहीं मिली। शासन की प्राथमिकता के बावजूद मामलों के समयबद्ध निस्तारण में लापरवाही सामने आने के बाद परिषद ने चार तहसीलदार और एक नायब तहसीलदार को निलंबित कर दिया है, जिसमें तहसीलदार पवन कुमार सिंह, तत्कालीन प्रभारी तहसीलदार, पट्टी, जनपद प्रतापगढ़ और वर्तमान में तहसीलदार प्रयागराज, तहसीलदार अतुल हर्ष, तहसील बलिया, तहसीलदार हरेराम यादव तत्कालीन नायब तहसीलदार, तहसील धनघटा और वर्तमान में तहसीलदार गोण्डा, तहसीलदार आनन्द ओझा, तहसील खलीलाबाद, संतकबीर नगर तथा नायब तहसीलदार विवेक कुमार सिंह, तहसील सरोजनीनगर, लखनऊ आदि शामिल हैं।
लगातार जारी रहेगी कार्रवाई, बर्दाश्त नहीं की जाएगी शिथिलता
राजस्व परिषद सचिव ने बताया कि पांचों अधिकारियों के निलंबन के साथ ही नियमानुसार अनुशासनिक कार्यवाही भी संस्थित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। संबंधित प्रकरणों में जिम्मेदारी तय की जाएगी और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित होगी। यह कार्रवाई कोई एकबारगी कदम नहीं है। लंबित राजस्व वादों के निस्तारण की निगरानी लगातार जारी रहेगी। अधिकारियों के कामकाज की प्रगति की नियमित समीक्षा की जाएगी और जहां भी निर्धारित समय सीमा के भीतर मामलों के निस्तारण में लापरवाही या उदासीनता सामने आएगी, वहां नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। परिषद ने साफ किया है कि राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों के निस्तारण में किसी भी स्तर पर शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारी के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करनी होगी, ताकि प्रदेश के किसानों एवं आम नागरिकों को त्वरित, पारदर्शी एवं सुलभ न्याय उपलब्ध हो सके।