वृंदावन में यमुना का जलस्तर बढ़ा, केशीघाट की सीढ़ियां डूबीं, निचले इलाकों में बढ़ी चिंताएं
मथुरा, 14 जुलाई (हि.स.)। पहाड़ों पर हो रही लगातार मूसलाधार बारिश अब मैदानी इलाकों के लिए मुसीबत बनती जा रही है। कुछ दिन पूर्व हथिनीकुंड बैराज से छोड़ा गया 50 हजार क्यूसेक पानी मंगलवार वृंदावन पहुंच चुका है। इसके चलते यमुना के जलस्तर में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वृंदावन के ऐतिहासिक केशीघाट की कई सीढ़ियां पानी में डूब चुकी हैं। वहीं प्रशासन द्वारा अभी कोई भी सुध नहीं लेने को लेकर स्थानीय लोगों और तीर्थपुरोहितों में भारी चिंता देखी जा रही है।
धर्मनगरी वृंदावन में यमुना का रौद्र रूप एक बार फिर लोगों को डराने लगा है। हथिनीकुंड बैराज से छोड़ा गया पानी मंगलवार को वृंदावन पहुंचा, जिसके बाद यमुना उफान पर हैं। केशीघाट पर यमुना का पानी घाट की सीढ़ियों को पार करते हुए ऊपर तक आ गया है। आलम यह है कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बनाया गया अस्थाई चेंजिंग रूम भी पानी में पूरी तरह डूबता हुआ दिखाई दे रहा है। यमुना का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में पानी भरना शुरू हो गया है। स्थानीय निवासी और तीर्थपुरोहित पिछले साल आई विनाशकारी बाढ़ को याद कर सहमे हुए हैं। पिछले वर्ष यमुना की बाढ़ ने वृंदावन और खादर के इलाकों में भारी तबाही मचाई थी, जिससे करोड़ों का नुकसान हुआ था।
यमुना महारानी मंदिर के सेवायत सिद्धार्थ ने बताया कि पानी लगातार बढ़ रहा है और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की धड़कनें तेज हो गई हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पिछले साल की विभीषिका से सबक लेने के बाद भी इस बार प्रशासन की ओर से बाढ़ से निपटने की कोई ठोस तैयारियां जमीन पर दिखाई नहीं दे रही हैं। यदि पानी का स्तर और बढ़ा, तो स्थिति एक बार फिर बेकाबू हो सकती है।
हिन्दुस्थान समाचार / महेश कुमार