मां लक्ष्मी के साथ करें सरस्वती और कुबेर की पूजा
-आज दीपावली पर लक्ष्मी पूजन शाम 5 बजकर 48 मिनट से शाम 7 बजकर 43 मिनट तक
मुरादाबाद, 08 नवंबर (हि.स.)। जनपद के आवास विकास स्थित सत्य श्री शिव एवं शनि मंदिर के मुख्य पुरोहित पंडित कैलाश मुरारी ने बताया कि आज दीपावली का पर्व धूमधाम से देशभर में मनाया जाएगा। दीपावली पर महालक्ष्मी की पूजा करने का विशेष महत्व होता है। दिवाली पर धन और सुख-समृद्धि की देवी मां लक्ष्मी की पूजा के साथ भगवान गणेश, कुबेर देवता और ज्ञान की देवी मां सरस्वती की पूजा करने विधान होता है। आज (8 नवंबर) दीपावली पर लक्ष्मी पूजन शाम 5 बजकर 48 मिनट से शाम 7 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। इस बीच लक्ष्मी पूजन करना सर्वोत्तम रहेगा।
पंडित कैलाश मुरारी ने बताया कि घरों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों में गणेश भगवान, मां लक्ष्मी, मां सरस्वती और कुबेर भगवान, बजरंग बली की पूजा अर्चना की जाती । यह पूजन प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के बाद के तीन मुहर्त में हाेता है। दिवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा अमावस्या तिथि में प्रदोष काल के दौरान स्थिर लग्न में करना सर्वाेत्तम माना गया है। इसके अलावा दिवाली पर तांत्रिक और साधकों के लिए मां लक्ष्मी की पूजा महानिशीथ काल में करना ज्यादा उपयुक्त माना गया है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दिवाली की रात माता लक्ष्मी बैकुंठ धाम से पृथ्वी लोक पर भ्रमण करने आती हैं और घर-घर जाकर यह देखती हैं कि किन घरों में साफ-सफाई, अच्छी सजावट और विधि-विधान के साथ पूजा हो रही है। जिन घरों में पूजा-पाठ और साफ-सफाई होती है वहीं पर मां लक्ष्मी विराजमान हो जाती हैं। दीपावली पर घर की साफ-सफाई और सजावट करके विधि-विधान से पूजन करने पर महालक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्ति होती है। दिवाली की रात मां लक्ष्मी के प्रसन्न होने पर जीवन में सुख, संपन्नता, धन-धान्य, समृद्धि और अपार धन-दौलत की कोई कमी नहीं होती। मां लक्ष्मी हर तरह की मनोकामनाओं का पूरा करती हैं।
पंडित कैलाश मुरारी ने बताया कि वैसे तो दिवाली से काफी दिनों पहले घरों की साफ-सफाई होती है, लेकिन दिवाली के दिन लक्ष्मी पूजन से पहले एक बार फिर से साफ-सफाई करें। घर के वातावरण को शुद्ध और पवित्र करने के लिए घर के हर कोनों में गंगाजल का छिड़काव करें। इसके बाद घर के मुख्य दरवाजे पर रंगोली और तोरण द्वार बनाएं। वहीं दरवाजे के दोनों हिस्सों में स्वास्तिक और शुभ-लाभ की आकृतियां बनाएं।
शाम के समय लक्ष्मी जी की पूजा के लिए सबसे पहले पूर्व दिशा या फिर ईशान कोण में एक चौकी रखें। फिर इस चौकी पर लाल रंग का साफ कपड़ा बिछाएं। इसके बाद चौकी पर भगवान गणेश की मूर्ति को विराजित करें और दाहिन तरफ मां लक्ष्मी की मूर्ति को रखें। साथ ही जल से भरा कलश भी रखें। फिर सभी पूजन सामग्री को साथ में लेकर आसान पर बैठें और चारो तरफ गंगाजल का छिड़काव करते हुए पूजा का संकल्प लेते हुए पूजा आरंभ कर दें।
सबसे पहले गणेश स्तुति और वंदना करते हुए गणेश की पुष्य, अक्षत, गंध, फल और भोग अर्पित हुए तिलक लगाएं। भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करते हुए मां लक्ष्मी को सिंदूर अर्पित करते हुए सभी तरह की पूजन सामग्री भेंट करें। फिर भगवान गणेश,माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना के बाद विधि-विधान के साथ कुबेर देव और मां सरस्वती की पूजा करें। इसके बाद परिवार सभी लोग महालक्ष्मी की आरती, मंत्रों का जाप और स्तुति पाठ करें। आरती और मंत्रों का जाप के बाद दीपक जलाएं और घर के हर एक हिस्से में रखें। महालक्ष्मी पूजन के बाद तिजोरी और बहीखाते की पूजा करें। इसके अलावा दिवाली पर पूर्वजों को याद करते हुए उनकी पूजा-अर्चना, धूप और भोग अर्पित करें।
----------------
हिन्दुस्थान समाचार / निमित कुमार जायसवाल