लखनऊ में ‘विश्व शांति एवं स्थिरता’ पर विशेष आयोजन 22 मार्च से शुरू

 


सांस्कृतिक आयोजन ही विश्व शांति और विकास की राह दिखाते हैं : जयवीर सिंह

लखनऊ, 20 मार्च (हि.स.)। उत्तर प्रदेश राजकीय अभिलेखागार और व्हाइटस्वान आर्ट, नई दिल्ली के सहयोग से 22 से 25 मार्च तक ‘विश्व शांति एवं स्थिरता के लिए समर्पित कला, संगीत और व्यंजन उत्सव’ का आयोजन किया जाएगा। यह चार दिवसीय कार्यक्रम लोगों को जोड़ने और मानवीय मूल्यों के संदेश को आसान और प्रभावी तरीके से सामने लाने का प्रयास है।

इस कार्यक्रम का उद्घाटन लखनऊ के शहीद स्मृति भवन, राज्य अभिलेखागार में 22 मार्च को किया जाएगा। इसमें मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. जय कृष्ण अग्रवाल मौजूद रहेंगे, जो प्रख्यात कलाकार हैं और लखनऊ विश्वविद्यालय के आर्ट कॉलेज के पूर्व डीन रह चुके हैं। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में इतिहासकार और लेखक डॉ. रवि भट्ट और नवभारत टाइम्स के रेजिडेंट एडिटर प्रो. सुधीर मिश्रा भी शामिल होंगे।

इस कार्यक्रम में 23 मार्च को व्हाइटस्वान आर्ट की फाउंडर डॉ. अंजली निगम तानपुरे पर प्रार्थना से कार्यक्रम की शुरुआत करेंगी। इसके बाद 'विश्व शान्ति एवं स्थिरता में समर्पित कला' विषय पर पैनल चर्चा होगी और लखनऊ के उभरते कलाकारों का संगीत कॉन्सर्ट भी आयोजित किया जाएगा। साथ ही प्रदेश के विस्मृत व्यंजनों के स्टॉल लगाए जाएंगे, जहां यूनेस्को से मिले गैस्ट्रोनॉमी दर्जे का जश्न मनाया जाएगा। 24 मार्च को पिसम (एक संस्था जो वंचित बच्चों की सहायता करती है) के सहयोग से विशेष जरूरतों वाले और वंचित बच्चों के लिए आर्ट कैंप आयोजित होगा, जिसमें कलाकार और आर्ट स्कूल भाग लेंगे। वहीं 25 मार्च को कार्यक्रम का समापन होगा।

व्हाइटस्वान आर्ट का उद्देश्य कला, संगीत और भोजन के जरिए दुनिया में शांति और सामंजस्य लाना है। यह संस्था मानती है कि कला इंसानियत की पहचान है, इसलिए उभरते कलाकारों, आर्ट स्टूडेंट्स और वंचित प्रतिभाओं को आगे बढ़ाकर कला को शांति का माध्यम बनाया जा सकता है, जो राजनीतिक और धार्मिक सीमाओं से ऊपर उठकर लोगों को जोड़ती है। इसी तरह संगीत को एक ऐसी ताकत माना गया है, जो बिना किसी सीमा के हर दिल तक पहुंचती है। ‘रिस्पॉन्सिबल म्यूजिक’ के जरिए उनका लक्ष्य युद्ध के शोर को कम कर शांति का संदेश फैलाना है।

इस आयोजन पर अपने विचार रखते हुए पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि, कला और संस्कृति केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने और मानवीय मूल्यों को सशक्त करने का सशक्त साधन हैं। ऐसे आयोजन न केवल हमारी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हैं, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ते हुए विश्व शांति और सतत विकास की दिशा में प्रेरित करते हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / दीपक