नारी सशक्तिकरण से ही राष्ट्र होगा मजबूत : प्रो. राजेश द्विवेदी

 


कानपुर, 20 अप्रैल (हि.स.)। नारी सशक्तिकरण केवल सामाजिक आवश्यकता नहीं, बल्कि राष्ट्र के समग्र विकास की आधारशिला है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 महिलाओं को निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे समाज में समानता और अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाएं और छात्र-छात्राओं को इसके प्रति संवेदनशील बनाएं। यह बातें सोमवार को स्कूल ऑफ बेसिक साइंसेज के निदेशक प्रो. राजेश द्विवेदी ने कही।

छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के स्कूल ऑफ बेसिक साइंसेज द्वारा नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ अंजू दीक्षित ने किया। आयोजन में डॉ द्रौपती यादव, डॉ शिखा शुक्ला, डॉ रश्मि दुबे और डॉ नेहा सहित अन्य शिक्षकों व छात्राओं ने अपने विचार साझा किए। इस दौरान महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में उत्कृष्ट योगदान देने वाली सहयोगी निशा निषाद तथा छात्राएं पूर्णिमा और नंदिका को सम्मानित किया गया।

उपनिदेशक डॉ अंजू दीक्षित को उनके कुशल निर्देशन और उत्कृष्ट कार्य के लिए विभिन्न विभागों की शिक्षिकाओं और शोध छात्राओं द्वारा सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के तहत छात्र-छात्राओं और शिक्षकों ने मिलकर एक विशाल नारी मानव श्रृंखला बनाई, जिसके माध्यम से महिला सशक्तिकरण और समानता का संदेश दिया गया।

परिसर में ‘नारी शक्ति दीवार’ भी बनाई गई, जहां प्रतिभागियों ने महिलाओं के अधिकारों और सम्मान से जुड़े संदेश लिखे। इसके साथ ही हस्ताक्षर अभियान में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों और शिक्षकों ने भाग लेकर अपना समर्थन दर्ज कराया।

भाषण और चर्चा सत्र में वक्ताओं ने अधिनियम के महत्व और इसके सामाजिक प्रभावों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण नारी शक्ति पदयात्रा रही, जिसमें नारी सशक्तिकरण, राष्ट्र का सशक्तिकरण जैसे नारों के साथ जागरूकता रैली निकाली गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और शिक्षक उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप