अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर जल सहेलियों का सम्मान, यमुना संरक्षण का लिया संकल्प
झांसी, 08 मार्च (हि.स.)। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर वृंदावन गार्डन सिमरावरी में जल सहेलियों के सम्मान एवं यमुना संरक्षण के संकल्प का कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत महिलाओं द्वारा दीप प्रज्ज्वलन से हुई। इसके बाद सभी जल सहेलियों ने एक-दूसरे को महिला दिवस और होली की रंग पंचमी की शुभकामनाएं दीं।
कार्यक्रम का संचालन सुलेखा ने किया। इस अवसर पर यमुना अविरल–निर्मल पदयात्रा में शामिल सभी जल सहेलियों को सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया गया।
इस मौके पर जल सहेली समिति के संस्थापक डॉ. संजय सिंह ने जल सहेलियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि यमुना अविरल–निर्मल पदयात्रा ने एक नया इतिहास रचा है। उन्होंने कहा कि त्याग और सत्य ही दुनिया की सबसे बड़ी ताकत हैं और इन्हीं मूल्यों के आधार पर जल सहेलियों ने 29 दिनों तक कठिन परिस्थितियों में यात्रा कर समाज के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। यह यात्रा केवल एक पदयात्रा नहीं, बल्कि शांति, जागरूकता और नदी संरक्षण का सशक्त संदेश है।
डॉ. संजय सिंह ने कहा कि समाज में कई तरह के सवाल उठते हैं, लेकिन सच्चे मन से किए गए कार्यों का सम्मान समय अवश्य करता है। उन्होंने जल सहेलियों के त्याग, समर्पण और संघर्ष को नमन करते हुए कहा कि यमुना मैया की कृपा से यह अभियान आगे भी समाज में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने का कार्य करता रहेगा।
कार्यक्रम में जल सहेली प्रभा देवी ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि यात्रा के दौरान अलग-अलग जिलों से आई महिलाएं एक परिवार की तरह बन गईं। इस यात्रा ने आपसी सहयोग, एकता और विश्वास को मजबूत किया।
जल सहेली मंजुलता ने कहा कि इस प्रकार की यात्राएं सीखने और जागरूकता बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष उन्होंने 20 दिनों की यात्रा की थी और इस बार पूरे एक महीने तक पदयात्रा में शामिल रहीं। उन्होंने कहा कि सभी जल सहेलियों ने संकल्प और समर्पण के साथ यात्रा को सफल बनाया और जल संरक्षण का संदेश समाज के हर वर्ग तक पहुंचाया।
मंजुलता ने बताया कि मथुरा से लेकर दिल्ली तक यमुना का जल काफी प्रदूषित हो चुका है, जिसे स्वच्छ और निर्मल बनाने के लिए समाज और सरकार दोनों को मिलकर कार्य करना होगा।
इसी श्रृंखला में जल सहेली जयंती ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस हम सबका दिन है। यह दिवस हमें अपने अधिकारों और संघर्षों की याद दिलाता है। महिलाओं की सशक्तता समाज में निरंतर बढ़ रही है, लेकिन अभी भी महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव को समाप्त करने में अपेक्षित सफलता पूरी तरह नहीं मिल पाई है। उन्होंने यह भी कहा कि जब महिलाएँ शिक्षित और जागरूक होंगी, तभी समाज और देश का वास्तविक विकास संभव हो पाएगा।
कार्यक्रम के अंत में सभी जल सहेलियों ने यमुना नदी को स्वच्छ, निर्मल और अविरल बनाए रखने का सामूहिक संकल्प लिया।
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हिन्दुस्थान समाचार / महेश पटैरिया