झांसी की परमार्थ संस्था को दिल्ली में मिला राष्ट्रीय ‘वाटर एक्सीलेंस अवार्ड’

 


जल संरक्षण और जल स्रोतों के पुनर्जीवन में उल्लेखनीय कार्यों के लिए मिला सम्मान बुंदेलखंड की ‘जल सहेलियों’ और ग्रामीण समुदायों को समर्पित की उपलब्धि

झांसी, 10 अगस्त (हि.स.)। जल संरक्षण और जल स्रोतों के पुनर्जीवन के क्षेत्र में बुंदेलखंड ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। नई दिल्ली स्थित प्रतिष्ठित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में व्हाइट डॉल्फिन मीडिया हाउस की ओर से आयोजित वाटर सिम्पोजियम में झांसी की अग्रणी स्वयंसेवी संस्था परमार्थ समाज सेवी संस्थान को प्रतिष्ठित ‘वाटर एक्सीलेंस अवार्ड’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान परमार्थ संस्थान के डॉ संजय सिंह ने प्राप्त किया।

संस्था को यह राष्ट्रीय सम्मान जल संरक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे निरंतर और उल्लेखनीय कार्यों, पारंपरिक जल स्रोतों के जीर्णोद्धार तथा पानी बचाने के अभियानों में ग्रामीण समुदायों की भागीदारी बढ़ाने के लिए प्रदान किया गया। बुंदेलखंड जैसे जल संकट से प्रभावित क्षेत्र में संस्था लंबे समय से ग्रामीणों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने और स्थानीय जल स्रोतों के पुनर्जीवन के लिए कार्य कर रही है।

जल विशेषज्ञों और वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी

राष्ट्रीय स्तर के इस कार्यक्रम में देशभर के प्रमुख जल विशेषज्ञ, पर्यावरणविद और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। मंच पर भारत के ‘जल पुरुष’ के नाम से विख्यात राजेंद्र सिंह, कोल इंडिया के प्रबंध निदेशक मनोज अग्रवाल, परमार्थ समाज सेवी संस्थान के अध्यक्ष डॉ. राणा प्रताप तथा बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के पूर्व डीन ऑफ एकेडमिक अफेयर्स मौजूद रहे। इसके अलावा कोल इंडिया के महाप्रबंधक, वरिष्ठ अधिकारियों और देशभर से आए पर्यावरणविदों ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।

‘कोल नीर’ पहल को सराहा

वाटर सिम्पोजियम के दौरान कोल इंडिया की जल संरक्षण पहल ‘कोल नीर’ को भी प्रस्तुत किया गया। इसके तहत कोयला खनन के दौरान निकलने वाले पानी को आधुनिक तकनीक से उपचारित कर उपयोग योग्य बनाया जा रहा है। पहले जिस पानी को अनुपयोगी मानकर बाहर बहा दिया जाता था, उसके उपचार के बाद पुन: उपयोग की पहल को विशेषज्ञों ने जल संकट से निपटने की दिशा में महत्वपूर्ण और सराहनीय कदम बताया।

‘जल सहेलियों’ के संघर्ष को समर्पित सम्मान

पुरस्कार प्राप्त करने के बाद परमार्थ संस्थान के प्रतिनिधियों ने कहा कि यह सम्मान केवल संस्था की उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे बुंदेलखंड का गौरव है। उन्होंने पुरस्कार को ‘परमार्थ परिवार’, गांव-गांव में जल संरक्षण के लिए संघर्ष कर रहीं ‘जल सहेलियों’ और उन ग्रामीण समुदायों को समर्पित किया, जो जल संकट के बावजूद जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।

प्रतिनिधियों ने कहा कि ग्रामीण महिलाओं और समुदायों की सक्रिय भागीदारी जल संरक्षण अभियानों की सबसे बड़ी ताकत है। उनके सामूहिक प्रयासों से पारंपरिक जल स्रोतों को बचाने और पानी के प्रति जिम्मेदारी की भावना को मजबूत किया जा रहा है।

कार्यक्रम के समापन पर विशेषज्ञों ने जल संरक्षण को भविष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता बताते हुए कहा कि “जल है तो जीवन है और जल संरक्षण ही सुरक्षित भविष्य का आधार है।”

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हिन्दुस्थान समाचार / महेश पटैरिया