गंगा सप्तमी: श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के घाट पर भव्य गंगा आरती, मां गंगा का षोडशोपचार पूजन

 




वाराणसी, 23 अप्रैल (हि.स.)। गंगा के अवतरण दिवस (गंगा सप्तमी) पर गुरुवार शाम वाराणसी के दशाश्वमेध सहित अन्य घाटों पर आयोजित विशेष गंगा आरती में शामिल होने के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। राजा भगीरथ के तपस्या के बाद ब्रह्म कमंडल से निकलीं गंगा के प्रति लोगों में आस्था दिखी। शाम को लोगों ने मां गंगा का पूजन कर दीपदान के बाद भव्य गंगा आरती में उल्लास और आस्था के साथ भागीदारी की। गंगा सप्तमी पर ही श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के घाट (ललिताघाट) पर भव्य गंगा आरती का आयोजन विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ।

इस अवसर पर मंदिर के अर्चकों ने मंत्रोंच्चार के बीच माँ गंगा का दुग्धाभिषेक किया, तत्पश्चात विधिपूर्वक षोडशोपचार पूजन संपन्न हुआ, जिसमें पूजन के समस्त निर्धारित अनुष्ठान पूर्ण किए गए। पूजन के उपरांत माँ गंगा को साड़ी अर्पित कर उनका विशेष श्रृंगार किया गया। इस दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं ने भी माँ गंगा के प्रति अपनी गहन आस्था एवं समर्पण भाव व्यक्त किया। पूरे कार्यक्रम के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार, दीपों की पावन ज्योति तथा घंटों की मधुर ध्वनि से सम्पूर्ण घाट का वातावरण अलौकिक एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत—प्रोत दिखी। गौरतलब हो कि वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मां गंगा स्वर्ग लोक से देवाधिदेव महादेव की जटाओं में पहुंची थी। इसलिए इस दिन को गंगा सप्तमी के रूप में मनाया जाता है। कहा जाता है कि गंगा नदी में स्नान करने से दस पापों का हरण होकर मुक्ति मिलती है। इस दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व है। मां गंगा में डुबकी लगाने से मनुष्य के सभी पाप धुल जाते हैं और मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी