केन्द्रीय मंत्री डॉ जितेन्द्र सिंह ने मातृदिवस पर बीएचयू में अपनी मां के नाम पर पौधा रोपा

 




बोले, अंतरिक्ष प्रयोगशालाएं, अनुसंधान अवसंरचना और उन्नत उपकरण भारत की वैज्ञानिक पहुंच को व्यापक बना रहे,अंतःविषयक केंद्र साथी का लिया जायजा

वाराणसी, 10 मई (हि.स.)। केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने मातृदिवस के अवसर पर रविवार को काशी हिन्दू विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत अपनी मां के नाम पर पौधरोपण किया। उन्होंने लोगों से भी इस अभियान से जुड़ने और पर्यावरण संरक्षण में भागीदारी निभाने की अपील की। मंत्री ने कहा कि बीएचयू परिसर में अपनी मां के नाम पर पौधा लगाना उनके लिए सौभाग्य की बात है।

इससे पूर्व डॉ. जितेंद्र सिंह ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के सहयोग से स्थापित बीएचयू के अंतःविषयक केंद्र ‘साथी’ का निरीक्षण किया। लगभग 72 करोड़ रुपये की लागत से विकसित इस अत्याधुनिक सुविधा की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि यह केंद्र देश में वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार को नई दिशा देने वाला मॉडल बन रहा है। इस अवसर पर केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि डीएसटी देश में उन्नत प्रौद्योगिकी, नवाचार और वैज्ञानिक सुविधाओं तक पहुंच को लोकतांत्रिक बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में वैज्ञानिक बुनियादी ढांचे और अनुसंधान सहायता प्रणालियों का विस्तार भी हो रहा है।

केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि साथी, एफआईएसटी, एआरआरएफ से जुड़े अनुसंधान सहायता तंत्र और अन्य संस्थागत कार्यक्रम जैसी पहलें अनुसंधान, नवाचार, स्टार्टअप और उद्योग-अकादमिक सहयोग के लिए एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र बनाने में मदद कर रही हैं, विशेष रूप से युवा शोधकर्ताओं, एमएसएमईज और उभरते उद्यमों के लिए। उन्होंने कहा कि डीएसटी के आउटरीच कार्यक्रम विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों में नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करके देश भर में उन्नत वैज्ञानिक अवसंरचना और तकनीकी शिक्षा तक व्यापक पहुंच बना रहे हैं। छात्रों और युवा शोधकर्ताओं में वैज्ञानिक सोच, नवाचार-आधारित शिक्षा और उभरती प्रौद्योगिकी क्षमताओं को बढ़ावा देने के लिए कई विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को अंतरिक्ष से संबंधित प्रयोगशालाओं और अनुसंधान कार्यक्रमों के माध्यम से जोड़ा जा रहा है। आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को साकार करने और उभरती प्रौद्योगिकियों एवं उन्नत अनुसंधान क्षेत्रों में भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए विश्वविद्यालयों में वैज्ञानिक अवसंरचना को मजबूत करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने लक्षित वैज्ञानिक हस्तक्षेपों और सहयोगात्मक अनुसंधान मंचों के माध्यम से संस्थागत अनुसंधान क्षमता, स्वदेशी नवाचार और प्रौद्योगिकी आधारित विकास को लगातार प्रोत्साहित किया है। इसके पहले बीएचयू कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने केन्द्रीय मंत्री का कार्यक्रम में फूलों का गुलदस्ता देकर स्वागत किया।

'साथी' में मिलने वाली सुविधाएं

साथी में कई अत्याधुनिक सुविधाएं हैं, जिनमें लाइव सेल इमेजिंग के साथ सुपर रिज़ॉल्यूशन कन्फोकल माइक्रोस्कोपी, उन्नत एन्एमआर स्पेक्ट्रोस्कोपी सिस्टम, हाई रिज़ॉल्यूशन एक्यूरेट मास स्पेक्ट्रोमेट्री, क्लीन रूम सुविधाएं, इलेक्ट्रोकेमिकल वर्कस्टेशन, क्रोमैटोग्राफी प्लेटफॉर्म और आइसोटोप विश्लेषण सिस्टम शामिल हैं। डीएसटी, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विज़न के अनुरूप, पूरे भारत में यूनिवर्सिटी और उच्च शिक्षण संस्थानों में अनुसंधान सहायता प्रणालियों का विस्तार कर रहा है, ताकि उन्नत प्रौद्योगिकी और नवाचार तक सभी की पहुंच आसान हो सके।

बताते चलें विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के लगभग 72 करोड़ रुपये के सहयोग से स्थापित साथी-बीएचयू एक राष्ट्रीय स्तर की साझा वैज्ञानिक अवसंरचना सुविधा है, जो शिक्षाविदों, अनुसंधान संस्थानों, उद्योगों, एमएसएमई और स्टार्टअप्स को उन्नत उपकरण, विश्लेषणात्मक सेवाएं और तकनीकी विशेषज्ञता प्रदान करती है।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी