मानसून की पहली दस्तक में ही वाराणसी में जलभराव, कचहरी पर भी जूझते दिखे अधिवक्ता

 




—पश्चिमी विक्षोभ का असर,ग्रामीण अंचल में बारिश से सिवान में बढ़ी रौनक,धान के बेहन को संजीवनी

वाराणसी, 06 जुलाई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी (काशी) में देर से सही सोमवार को मानसून ने जोरदार दस्तक दे दी है। मानसून की पहली बारिश में ही शहर के कई हिस्सों में सड़कों और गलियों में जलभराव का नजारा दिखा। कचहरी स्थित जिला मुख्यालय के प्रमुख द्वार के बाहर जलजमाव के चलते अधिवक्ताओं के साथ वादकारियों और अन्य लोगों को भी इससे जूझना पड़ा। खासकर पैदल चलने वाले जलभराव के चलते खासे परेशान दिखे।

शहरी हिस्सों में नगर निगम के नालों की सफाई के दावों के बावजूद जलभराव होने से आम जनजीवन प्रभावित हुआ। मानसून की दस्तक से लोगों को तल्ख धूप और उमस से जहां राहत मिली। वहीं,गंगाघाटों पर लोग बारिश में भीगते हुए तफरी करते दिखे। मौसम के तेवर में आए बदलाव से जनपद में अधिकतम तापमान भी गिर गया है। 40 डिग्री सेल्सियस के उपर रहने वाला तापमान 33 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच गया है। बीते रविवार को दिन में तीखी धूप और उमस भरी गर्मी ने लोगों को बेहाल कर दिया था। 39.1 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ वाराणसी यूपी का तीसरा सबसे गर्म शहर रहा।

यूपी आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। ऐसे में मानसूनी सक्रियता बढ़ने के संकेत हैं। इसके मौजूदा पश्चिमी विक्षोभ के साथ मिलने की वजह से प्रदेश में कहीं-कहीं अचानक तेज बारिश हो सकती है। बारिश के लिए मौसम विभाग ने यलो अलर्ट भी जारी है। मंगलवार से 11 जुलाई के बीच जिले में तेज बारिश का अनुमान है। मौसम विभाग ने 8 जुलाई को वज्रपात का अलर्ट जारी किया है।

उधर, जनपद के ग्रामीण अंचल खासकर सिवान में किसानों को सक्रियता बढ़ गई। जिन किसानों ने अपने खेतों में पहले धान का बेहन डाल दिया है। वे खेत का मेढ़बंदी करते दिखे। वहीं,अन्य किसान धान का बेहन डालने के लिए खेतों को तैयार करने के साथ जुताई में जुटे रहे। बताया जा रहा है कि मानसून की पहली बारिश सूख रहे धान के बेहन के लिए संजीवनी साबित होगी।

——सुबह तेज बारिश तो सड़कों पर उतरी नगर निगम की टीम, नगर आयुक्त ने संभाली कमान

शहर में सोमवार सुबह और दोपहर हुई तेज बारिश के बाद सोशल मीडिया में जनसामान्य को जलजमाव से जूझते देख नगर निगम की टीम भी सड़कों पर दिखी। पूरी व्यवस्था की कमान खुद नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने संभाली। उन्होंने इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य और जलकल विभाग के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर जल निकासी पर जोर दिया। जलकल विभाग को नालों की स्थिति जांचने, स्वास्थ्य विभाग को गलीपिटों को साफ करने और अभियंत्रण विभाग को निचले इलाकों में तत्काल पंप लगाने के निर्देश दिए गए। सारनाथ म्यूजियम रोड और दानियालपुर ईदगाह रोड सहित एक दर्जन से अधिक प्रमुख स्थानों पर तत्काल गलीपिटों की सफाई कराई गई। इसका परिणाम यह हुआ कि बंद पड़े मुंह खुलते ही बरसाती पानी निकल गया। इसी तरह काशी विद्यापीठ रोड स्थित सरस्वती नगर, विकास भवन के सामने और सिगरा-फातमान रोड सहित दर्जनों स्थानों पर सीवर के चैंबर खोलकर पानी निकाला गया। अमूमन भारी बारिश में जलमग्न होने वाले अंधरापुल के नीचे इस बार जलभराव की स्थिति नहीं दिखी, फिर भी निगम ने एहतियातन वहां पंप तैनात रखा। इसके अलावा सिंधुरिया कॉलोनी (महेशपुर) सहित अन्य निचले इलाकों में तुरंत पंप चालू कर पानी निकाला गया। साथ ही फुलवरिया, कोटवा और नई बस्ती में युद्धस्तर पर नाला सफाई अभियान चलाने का दावा किया गया।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी