श्रद्धेय अशोक सिंहल ने हिन्दू समाज को जगाने का उठाया बीड़ा, श्रीरामजन्मभूमि आंदोलन को दी गति : चंपत राय

 


कानपुर, 30 सितंबर (हि.स.)। श्रद्धेय अशोक सिंहल जी ने हिन्दू समाज को जगाने का बीड़ा उठाया और विभिन्न मत, पंथ व संप्रदायों के संतों को एक मंच पर लाकर श्रीरामजन्मभूमि आंदोलन को गति दी। यह बातें बुधवार को विहिप के केंद्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय ने बीएनएसडी शिक्षा निकेतन, बेनाझाबर में बुधवार को आयोजित अशोक सिंहल जन्मशताब्दी वर्ष उद्घाटन समारोह में कहीं।

विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) कानपुर प्रान्त के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन गणेश पूजन के साथ स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती महाराज, चंपत राय, राजकुमार लोहिया, गजेन्द्र और राजीव महाना ने श्रीराम दरबार का पूजन कर किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता लोहिया कॉर्प लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक राजकुमार लोहिया ने की। मुख्य अतिथि के रूप में अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री पूज्य स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती जी महाराज उपस्थित रहे।

चंपत राय ने श्रीरामजन्मभूमि आंदोलन के संघर्षपूर्ण दिनों का स्मरण करते हुए कहा कि श्रद्धेय अशोक सिंहल जी आधुनिक भारत में सनातन जागरण के युगपुरुष थे। उन्होंने ऐसे समय में हिन्दू समाज को संगठित किया, जब अपनी आस्था, पहचान और सांस्कृतिक स्वाभिमान की बात करना चुनौतीपूर्ण माना जाता था। उन्होंने देश के विभिन्न मत, पंथ और संप्रदायों के साधु-संतों को एक मंच पर लाकर आंदोलन को गति दी और इसे बड़े जन-आंदोलन में परिवर्तित किया।

उन्होंने कहा कि 1984 में धर्म संसद से लेकर शिलापूजन, कारसेवा और गांव-गांव जन-जागरण तक अशोक सिंहल का जीवन श्रीराम के कार्य के लिए समर्पित रहा। अयोध्या में श्रीरामलला का मंदिर उनके संकल्प और रामभक्तों व संतों के संघर्ष का परिणाम है। अशोक सिंहल का मानना था कि राम मंदिर केवल एक पाषाण संरचना नहीं, बल्कि भारत के सांस्कृतिक स्वाभिमान और राष्ट्रीय अस्मिता का विषय है। उन्होंने सामाजिक समरसता, वंचित वर्गों के उत्थान और धर्मांतरण रोकने के लिए भी काम किया।

मुख्य अतिथि पूज्य स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि पूज्य अशोक सिंहल संतों के हृदय में बसते थे। उन्होंने भारत की संत शक्ति को संगठित कर राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित किया। उन्होंने देश और दुनिया के हिन्दुओं को एक सूत्र में जोड़कर सांस्कृतिक एकता का उदाहरण प्रस्तुत किया।

समारोह की अध्यक्षता करते हुए उद्योगपति राजकुमार लोहिया ने कहा कि अशोक सिंहल का त्याग, समर्पण और राष्ट्र-चेतना समाज को प्रेरणा देती रहेगी। उनका जीवन राष्ट्र और धर्म की सेवा से जुड़ा रहा।

कार्यक्रम में श्रद्धेय अशोक सिंहल के समय कार्य करने वाले बंधुओं को सम्मानित किया गया। वरिष्ठ स्वयंसेवक ज्ञानेन्द्र मिश्रा, प्रकाश शर्मा, दीपक राजे और अशोक बाजपेई ने अशोक सिंहल से जुड़े संस्मरण साझा किए।

प्रान्त मंत्री राजू पोरवाल ने संगठनात्मक वृत्त रखते हुए बताया कि जन्मशताब्दी वर्ष के अंतर्गत आगामी एक वर्ष तक कानपुर प्रान्त के प्रत्येक जिले, प्रखंड और ग्राम स्तर पर विचार गोष्ठियां, धर्मसभाएं, समरसता सम्मेलन और सेवा कार्य आयोजित किए जाएंगे।

इस अवसर पर मंच एवं सभागार में चम्पतराय, पूज्य स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह व्यवस्था प्रमुख अनिल ओक, कानपुर प्रान्त संघचालक भवानी भीख, पंचदशनाम जून अखाड़ा की महामंडलेश्वर माँ योगेश्वरी यति, विहिप के क्षेत्र संगठन मंत्री गजेंद्र, विहिप प्रान्त अध्यक्ष राजीव महाना, प्रान्त कार्याध्यक्ष डॉ. उमेश पालीवाल, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग संघचालक डॉ. श्यामबाबू गुप्ता, विभाग प्रचारक बैरिस्टर, विहिप प्रान्त मंत्री राजू पोरवाल, प्रान्त सह मंत्री अभिनव दीक्षित तथा अवधेश भदौरिया, क्षेत्र विशेष संपर्क प्रमुख अनिल दीक्षित, विभाग अध्यक्ष नरेश माहेश्वरी, विभाग मंत्री गौरांग तथा विभाग संगठन मंत्री मनीष, सुशील गुप्ता, युवराज प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में बजरंग दल के पूर्व राष्ट्रीय संयोजक प्रकाश शर्मा, नीतू सिंह, डॉ. अंगद सिंह, ब्रजमोहन, स्वप्निल वरुण, नरेश तोमर, प्रान्त व विभाग के प्रमुख पदाधिकारी, संत, नागरिक और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप