रोजगार उत्पन्न करने वाले पाठ्यक्रम विकसित करें : प्रोफेसर सत्यकाम
--यूपीआरटीओयू में स्नातक रोजगारपरकता पर तीन दिवसीय कार्यशाला प्रारम्भ
प्रयागराज, 04 मई (हि.स)। उ.प्र राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय में सोमवार को यूपीआरटीओयू और राष्ट्रमंडल शैक्षिक मीडिया केंद्र एशिया, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में स्नातक रोजगारपरकता विषय पर तीन दिवसीय कार्यशाला का शुभारम्भ हुआ।
मुक्त विवि के कुलपति प्रो. सत्यकाम ने कहा कि रोजगारपरकता आज समय की मांग है। हमें ऐसे पाठ्यक्रम विकसित करने पर काम करना चाहिए जो रोजगार उत्पन्न करें। मुक्त विश्वविद्यालय ने म्यूजियोलॉजी, पुस्तकालय विज्ञान और शिक्षा में पाठ्यक्रम विकसित किए हैं। उन्होंने कहा कि एमबीए जैसे पूर्णतः रोजगारपरक पाठ्यक्रमों को भी बाजार की मांग के अनुसार पुनः डिजाइन किया जाना चाहिए।
सेमका, नई दिल्ली के निदेशक डॉ. बी. शादराच ने ऑनलाइन सम्बोधन में रोजगारपरकता बढ़ाने में लॉजिस्टिक्स प्रबंधन और आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने उत्तर प्रदेश की एक जिला एक उत्पाद जैसी योजनाओं की सराहना की और शिक्षा व रोजगार के बीच की खाई को पाटने पर बल दिया।
उदघाटन सत्र में कॉमनवेल्थ ऑफ लर्निंग सेमका प्रोजेक्ट के सलाहकार डॉ. प्रदीप के चौधरी ने कहा कि कौशल और ज्ञान वृद्धि महत्वपूर्ण है। लेकिन केवल इससे नौकरी उत्पन्न नहीं होती। उन्होंने स्किलिंग, री-स्किलिंग और अप-स्किलिंग को विस्तार से समझाया और रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम के डिजाइन और विकास की प्रक्रिया बताई।
विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी डॉ प्रभात चन्द्र मिश्र ने बताया कि विश्वविद्यालय के प्रत्येक विद्या शाखा के शिक्षक इस कार्यशाला में भाग ले रहे हैं। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य ऐसे पाठ्यक्रमों का विकास करना है, जिनसे सीधे रोजगार उत्पन्न हो सके। तीन दिनों तक इन्हीं बिंदुओं पर विचार मंथन किया जाएगा। कार्यशाला का समापन 6 मई को होगा। कार्यशाला में अतिथियों का स्वागत कार्यशाला संयोजक डॉ. त्रिविक्रम तिवारी ने व मंच संचालन आयोजन सचिव डॉ. गौरव संकल्प ने तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रो. आनंदानंद त्रिपाठी ने किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / विद्याकांत मिश्र