पीसीएस 2024 : सीतापुर की पूर्णिमा ने 96वीं और अंशू ने हासिल की 99वीं रैंक
सीतापुर , 30 मार्च (हि.स.)। सीतापुर जनपद की बेटियों ने एक बार फिर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। जिले के पहला क्षेत्र की पूर्णिमा सिंह यादव और अटरिया की अंशू सिंह ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीसीएस 2024) परीक्षा में शानदार सफलता हासिल कर न सिर्फ अपने परिवार बल्कि पूरे जनपद का नाम रोशन किया है। इनमें पूर्णिमा काे 96 रैंक मिली है ताे वहीं अंशू सिंह काे 99 रैंक मिली है।
पूर्णिमा सिंह यादव ने सीमित साधनाें में पायी सफलता
सीतापुर जिले के विकास खंड पहला क्षेत्र के ग्राम मोहम्मदपुर कलां की पूर्णिमा सिंह यादव ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीसीएस-2024) परीक्षा में 96वीं रैंक हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है। उनकी इस सफलता से गांव और आसपास के क्षेत्रों में खुशी की लहर दौड़ गई है।पूर्णिमा एक साधारण परिवार से आती हैं, लेकिन उन्होंने कठिन परिश्रम, अटूट लगन और मजबूत इरादों के दम पर यह मुकाम हासिल किया। उनके पिता नरेंद्र सिंह यादव ने हमेशा उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
जैसे ही उनकी सफलता की खबर गांव पहुंची, बधाई देने वालों का तांता लग गया। क्षेत्रीय विद्यालयों के शिक्षक, प्रिंसिपल, सहपाठी और गणमान्य लोगों ने उन्हें शुभकामनाएं दीं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। पूर्णिमा की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि सीमित संसाधन भी बड़े सपनों को रोक नहीं सकते। उन्होंने अपने परिवार और गांव का नाम गर्व से ऊंचा किया है।
पहले प्रयास में अंशू सिंह बनीं पीसीएस अफसर
सीतापुर के अटरिया क्षेत्र के ससेना गांव की अंशू सिंह ने पहले ही प्रयास में 99वीं रैंक प्राप्त कर वाणिज्य कर अधिकारी का पद हासिल कर अपने परिवार और क्षेत्र का नाम रोशन किया है। अंशू की प्रारंभिक शिक्षा अटरिया के एस.आर.के. पब्लिक इंटर कॉलेज से हुई। लखनऊ विश्वविद्यालय से बीएससी (गणित) की डिग्री प्राप्त की। उनके पिता राम बहादुर सिंह जहां एक ओर एस.आर. ग्लोबल स्कूल में अंग्रेजी के शिक्षक हैं, वहीं खेती भी करते हैं। उनकी माता अमिता सिंह गृहिणी हैं। छोटे भाई अभय सिंह वर्तमान में लखनऊ विश्वविद्यालय से एमएससी की पढ़ाई कर रहे हैं।
इंटरमीडिएट के बाद अंशू और उनके भाई ने लगभग पांच वर्षों तक लखनऊ में किराए के कमरे में रहकर पढ़ाई की। इसी दौरान अंशू ने सिविल सेवा की तैयारी शुरू की और कोचिंग संस्थान से मार्गदर्शन लिया। कोचिंग के बाद भी उन्होंने नियमित अध्ययन जारी रखा और हर रविवार को मॉक टेस्ट देकर अपनी तैयारी को मजबूत किया। अंशू का मानना है कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। उन्होंने कहा कि दृढ़ संकल्प, नियमित पढ़ाई और सही दिशा में मेहनत से किसी भी लक्ष्य को पाया जा सकता है। अपनी सफलता का श्रेय उन्होंने अपने माता-पिता, भाई और दादा सुरेंद्र सिंह राठौर व देवनारायण सिंह को दिया।
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हिन्दुस्थान समाचार / Mahesh Sharma