15 मेडिकल कॉलेजों की फार्मेसी में यूपीएफएसडीए ने की औचक जांच, 15 निर्माता फर्मों के 49 सीएंडएफ/डिस्ट्रीब्यूटर/स्टॉकिस्ट को नोटिस
मरीजों को उचित दर पर दवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रदेशव्यापी अभियान तेज
दवाओं की गुणवत्ता की जांच के लिए 90 औषधि नमूने संग्रहित किए गए
अभियान के प्रथम चरण में 50 औषधि निरीक्षकों की टीमों ने नौ जनपदों में की सघन जांच
15 सरकारी एवं निजी मेडिकल कॉलेजों की फार्मेसियों का औचक निरीक्षण, चार राजकीय और 11 निजी मेडिकल कॉलेज शामिल
निरीक्षण के दौरान दवाओं की खरीद दर और मरीजों से वसूली जा रही कीमत की हुई जांच
दवाओं की गुणवत्ता, भंडारण, बिलिंग और कोल्ड-चेन व्यवस्था की भी की गई जांच
लखनऊ, 26 सितंबर। आमजन को गुणवत्तापूर्ण औषधियां उचित दर पर उपलब्ध कराने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) विभाग ने प्रदेशव्यापी विशेष अभियान शुरू किया है। अभियान के प्रथम चरण में 50 औषधि निरीक्षकों की टीमों ने नौ जनपदों में स्थित 15 सरकारी एवं निजी मेडिकल कॉलेजों की फार्मेसियों का औचक निरीक्षण किया। इनमें चार राजकीय और 11 निजी मेडिकल कॉलेज शामिल हैं। निरीक्षण के दौरान दवाओं की खरीद दर और मरीजों से वसूली जा रही कीमत के साथ-साथ दवाओं की गुणवत्ता, भंडारण, बिलिंग और कोल्ड-चेन व्यवस्था की भी जांच की गई।
विभाग के अनुसार 24 सितंबर 2026 से शुरू विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य मेडिकल कॉलेज एवं अस्पतालों की फार्मेसियों में मरीजों को जीवनरक्षक एवं आवश्यक दवाओं की उचित दर पर उपलब्धता सुनिश्चित करना है। जांच टीमों ने फार्मेसियों में फार्मेसिस्ट की उपस्थिति, जीवनरक्षक दवाओं के बिलिंग रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर, कोल्ड-चेन मेंटेनेंस, दवाओं की भंडारण व्यवस्था तथा औषधियों की गुणवत्ता की जांच की। साथ ही मेडिकल कॉलेज द्वारा दवाओं की खरीद जिस दर पर की गई और मरीजों को जिस दर पर बिक्री की गई, उसका भी मिलान किया गया।
खरीद दर और एमआरपी में मिला बड़ा अंतर
जांच के दौरान मुख्य रूप से कुछ निजी मेडिकल कॉलेजों में अत्यधिक इस्तेमाल होने वाली और कतिपय जीवनरक्षक औषधियों के परचेज प्राइस और एमआरपी के बीच काफी अंतर पाया गया। विभाग के मुताबिक, कई मामलों में अस्पतालों ने दवाएं प्रिंटेड एमआरपी से काफी कम कीमत पर खरीदीं, लेकिन मरीजों को लेबल पर अंकित एमआरपी पर दवाएं उपलब्ध कराई जा रही थीं।ऐसी औषधियों को विभाग ने चिन्हित किया है। इनकी गुणवत्ता की जांच के लिए 90 औषधि नमूने संग्रहित किए गए हैं। साथ ही संबंधित निर्माता फर्मों को नोटिस जारी कर दवाओं के प्रिंटेड एमआरपी और अस्पताल के स्टॉकिस्ट को उपलब्ध कराई गई प्राइस टू रिटेलर (पीटीआर) दर के बीच अंतर पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा जा रहा है। विभाग की ओर से अस्पतालों को दवाओं की आपूर्ति करने वाले होलसेलर्स की भी जांच की जा रही है। इसमें अस्पताल को उपलब्ध कराई गई आपूर्ति दर और सामान्य रिटेल आपूर्ति दर के बीच अंतर की जांच की जा रही है।
दो मेडिकल कॉलेजों में डीपीसीओ उल्लंघन
जांच में तीर्थंकर महावीर मेडिकल कॉलेज, मुरादाबाद में चार और जीएस मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, हापुड़ में तीन औषधियों में औषधि मूल्य नियंत्रण आदेश (डीपीसीओ), 2013 के उल्लंघन की जानकारी सामने आई। इस संबंध में संबंधित निर्माता फर्मों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं।
दो मेडिकल कॉलेजों में कोल्ड-चेन व्यवस्था में खामी
हिंद इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, बाराबंकी और जीएस मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, हापुड़ में दवाओं की कोल्ड-चेन व्यवस्था मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई। विभाग ने संबंधित अस्पतालों को निर्देश दिए हैं कि ऐसी औषधियों का पूरा स्टॉक संबंधित मैन्युफैक्चरिंग फर्म को वापस भेजा जाए।
संतोष मेडिकल कॉलेज में 4.86 करोड़ की दवाओं की बिक्री पर रोक
संतोष मेडिकल कॉलेज, गाजियाबाद में आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी विसंगतियां सामने आने के बाद विभाग ने 4.86 करोड़ रुपये मूल्य की औषधियों के विक्रय पर रोक लगा दी है। इसके अलावा कुछ फार्मेसियों द्वारा मौके पर औषधियों के क्रय बिल उपलब्ध नहीं कराए जा सके। ऐसे सभी प्रतिष्ठानों को भी नोटिस जारी किए जा रहे हैं।
76 औषधियों में सीलिंग प्राइस से अधिक एमआरपी का मामला
विभाग ने केवल मेडिकल कॉलेजों की मौजूदा जांच तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रखी है। पिछले एक वर्ष में विभागीय निरीक्षणों के दौरान प्राप्त अभिलेखीय साक्ष्यों के आधार पर बाजार में उपलब्ध 76 औषधियों में डीपीसीओ, 2013 के तहत निर्धारित सीलिंग प्राइस से अधिक एमआरपी पर बिक्री के मामले सामने आए हैं।
दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश
इन मामलों में 15 औषधि विनिर्माण इकाइयों के 49 सीएंडएफ, प्रमुख डिस्ट्रीब्यूटर्स और स्टॉकिस्ट्स को नोटिस जारी किए गए हैं। संबंधित प्रतिष्ठानों से कहा गया है कि यदि उनके पास राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) की ओर से कोई विशिष्ट वैधानिक छूट अथवा एथिकल रिलैक्सेशन प्राप्त है तो उसके दस्तावेज उपलब्ध कराएं। अन्यथा निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर स्टॉकिस्ट को आपूर्ति किए गए पूरे स्टॉक को बाजार से वापस कराने की कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
डीपीसीओ और एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट के तहत होगी कार्रवाई
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने स्पष्ट किया है कि औषधि (मूल्य नियंत्रण) आदेश, 2013 का अनुपालन आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3 के तहत अनिवार्य और बाध्यकारी है। विभाग ने संबंधित मामलों में डीपीसीओ और एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट के प्रावधानों के तहत कार्रवाई के लिए स्थानीय जनपदों के औषधि निरीक्षकों को निर्देशित किया है।
इन मेडिकल कॉलेजों में हुई जांच
प्रथम चरण में नौ जनपदों में स्थित 15 मेडिकल कॉलेजों की फार्मेसियों का निरीक्षण किया गया। इनमें एसएन मेडिकल कॉलेज, आगरा, राजकीय मेडिकल कॉलेज, अयोध्या, हिंद इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, बाराबंकी, डॉ. केएनएस मेमोरियल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज/मेयो इंस्टीट्यूट, बाराबंकी, रोहिलखंड मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, बरेली, संतोष मेडिकल कॉलेज, गाजियाबाद, जीएस मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, हापुड़, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज, कानपुर, डॉ. बीएस कुशवाह मेडिकल कॉलेज, कानपुर, नारायण मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर, कानपुर, रामा मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, कानपुर, तीर्थंकर महावीर मेडिकल कॉलेज, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज, मुजफ्फरनगर, हेरिटेज इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, वाराणसी तथा आयुर्विज्ञान संस्थान, बीएचयू, वाराणसी शामिल हैं।