हब एंड स्पोक मॉडल पर 09 जोन में विकसित होगा सरदार पटेल रोजगार एवं औद्योगिक क्षेत्र

 


-मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल से उद्योगों को मिलेगा विश्वस्तरीय कुशल मानव संसाधन, युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के नए अवसर

लखनऊ, 15 जुलाई (हि. स.)। उत्तर प्रदेश में युवाओं को कौशल, रोजगार, उद्योग और उद्यमिता से एक ही मंच पर जोड़ने वाली महत्वाकांक्षी सरदार वल्लभभाई पटेल रोजगार एवं औद्योगिक क्षेत्र (एसवीपीईआईजेड) परियोजना अब धरातल पर उतरने जा रही है। इस वर्ष उत्तर प्रदेश दिवस के अवसर पर घोषित इस परियोजना के अंतर्गत प्रथम चरण में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के माध्यम से 05, यूपीसीडा के माध्यम से 05, यूपीईडा के माध्यम से 02, यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) के माध्यम से 02, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के माध्यम से 01 तथा गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण के माध्यम से 01, कुल 16 एसवीपीईआईजेड केंद्रों की स्थापना, विकास एवं संचालन कराया जाएगा। इसके साथ ही प्रदेश को 09 हब एंड स्पोक मॉडल पर आधारित औद्योगिक एवं कौशल विकास नेटवर्क के रूप में विकसित किया जाएगा।

प्रमुख सचिव, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम शशि भूषण लाल सुशील ने बताया कि वर्ष 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में निवेश और औद्योगिक गतिविधियों में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। ग्लोबल निवेशकों के आगमन, नए औद्योगिक क्षेत्रों के विस्तार तथा बदलती तकनीकी आवश्यकताओं को देखते हुए आने वाले वर्षों में बड़ी संख्या में कुशल मानव संसाधन की आवश्यकता होगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप इसी आवश्यकता को ध्यान में रखकर एसवीपीईआईजेड की अवधारणा तैयार की गई है, ताकि प्रदेश के युवाओं को उद्योगों की मांग के अनुरूप प्रशिक्षित कर उन्हें रोजगार और स्वरोजगार से सीधे जोड़ा जा सके।

उन्होंने बताया कि प्रदेश को 09 हब एंड स्पोक जोन में विकसित किया जाएगा। इनमें गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद एवं हापुड़, सहारनपुर मंडल के साथ मेरठ, बागपत और बुलंदशहर, मुरादाबाद एवं बरेली मंडल, आगरा एवं अलीगढ़ मंडल, लखनऊ एवं अयोध्या मंडल, कानपुर एवं प्रयागराज मंडल, चित्रकूट, झांसी एवं विंध्याचल मंडल, वाराणसी एवं आजमगढ़ मंडल तथा गोरखपुर, बस्ती एवं देवीपाटन मंडल को शामिल किया गया है। प्रत्येक जोन स्थानीय औद्योगिक क्षमता, उपलब्ध संसाधनों और निवेश की संभावनाओं के अनुरूप विकसित होगा।

प्रमुख सचिव ने बताया कि प्रत्येक एसवीपीईआईजेड को वन स्टॉप इंडस्ट्रियल, स्किल एंड एम्प्लॉयमेंट इकोसिस्टम के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां कौशल विकास केंद्र, औद्योगिक भूखंड, प्लग एंड प्ले औद्योगिक शेड, साझा सुविधा केंद्र, रोजगार सहायता केंद्र, उद्यमिता सहायता केंद्र, डिजिटल साक्षरता, विदेशी भाषा प्रशिक्षण, व्यावसायिक सेवाएं तथा आधुनिक आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध होंगी। प्लग एंड प्ले व्यवस्था के तहत उद्यमियों को तैयार औद्योगिक परिसर, विद्युत, जल, सड़क और अन्य आवश्यक सुविधाओं सहित ऐसा वातावरण मिलेगा, जहां वे न्यूनतम समय में उत्पादन शुरू कर सकेंगे। इससे निवेश को गति मिलेगी और स्थानीय युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

उन्होंने बताया कि परियोजना का भूमि उपयोग भी आधुनिक औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप निर्धारित किया गया है। इसमें कौशल विकास, औद्योगिक इकाइयों, प्लग एंड प्ले सुविधाओं, हरित क्षेत्र, सड़क एवं आधारभूत संरचना तथा वाणिज्यिक गतिविधियों के लिए पृथक क्षेत्र विकसित किए जाएंगे। जहां पर्याप्त भूमि उपलब्ध नहीं होगी, वहां बहुमंजिला औद्योगिक परिसर और फ्लैटेड फैक्ट्री मॉडल अपनाया जाएगा।

प्रमुख सचिव ने बताया कि प्रत्येक हब के लिए एसपीवी का गठन किया जाएगा तथा संबंधित हब के प्रमुख निवेशक को उसका अध्यक्ष बनाया जाएगा। इससे उद्योगों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित होगी और परियोजना का संचालन अधिक प्रभावी एवं परिणामोन्मुख होगा।

उन्होंने बताया कि परियोजना का स्वरूप तय करने से पहले अधिकारियों के दल ने गुजरात और महाराष्ट्र में टाटा समूह द्वारा विकसित औद्योगिक एवं कौशल विकास मॉडल का अध्ययन एवं भ्रमण किया। वहां के सफल अनुभवों और वैश्विक मानकों के आधार पर उत्तर प्रदेश के लिए उपयुक्त मॉडल तैयार किया गया है। परियोजना के विकास और संचालन में भी प्रतिष्ठित औद्योगिक संस्थानों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी।

उन्होंने बताया कि जिन स्थानों पर भूमि उपलब्ध है वहां निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ किया जाएगा, जबकि अन्य स्थानों पर यूपीसीडा, यूपीईडा, यीडा तथा अन्य विकास प्राधिकरणों के सहयोग से भूमि उपलब्ध कराकर परियोजना का विस्तार किया जाएगा। साथ ही अवसंरचना निर्माण के समानांतर युवाओं के कौशल विकास और प्रशिक्षण की प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी जाएगी, ताकि उद्योगों के संचालन के समय प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध रहे।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की मंशा एसवीपीईआईजेड को केवल औद्योगिक परिसर के रूप में विकसित करने की नहीं है, बल्कि इसे निवेश, कौशल विकास, रोजगार, नवाचार और उद्यमिता का समेकित केंद्र बनाया जाएगा। यह परियोजना प्रदेश की युवा शक्ति को भविष्य की औद्योगिक अर्थव्यवस्था के अनुरूप तैयार करते हुए उत्तर प्रदेश को देश का अग्रणी विनिर्माण, कौशल विकास और रोजगार सृजन केंद्र बनाने की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिलीप शुक्ला