सावन के पहले सोमवार पर 94 साल पुरानी परंपरा निभा 40 हजार यदुवंशियों ने किया बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक
11 किलोमीटर की शोभायात्रा में 10 शिवालयों में हुआ जलाभिषेक, जगह-जगह पुष्पवर्षा और फलाहार से स्वागत
वाराणसी, 03 अगस्त (हि.स.)। सावन माह के पहले सोमवार पर धार्मिक नगरी वाराणसी में यदुवंशी समाज ने 94 वर्षों से चली आ रही जलाभिषेक की परंपरा पूरे श्रद्धा, उत्साह और उल्लास के साथ निभाई। चंद्रवंशी गोप सेवा समिति के बैनर तले निकली भव्य जलाभिषेक शोभायात्रा में 40 हजार से अधिक यादव बंधुओं ने विश्व कल्याण की कामना के साथ बाबा श्री काशी विश्वनाथ सहित 10 प्रमुख शिवालयों में जलाभिषेक किया।
—गौरी केदारेश्वर से शुरू हुई भव्य शोभायात्रा
केदारघाट स्थित श्री गौरी केदारेश्वर महादेव मंदिर में विधिवत पूजन और जलाभिषेक के बाद यात्रा का शुभारंभ हुआ। शोभायात्रा में सबसे आगे यदुवंशी समाज का ध्वज और डमरू बजाते युवाओं का दल चल रहा था। हर-हर महादेव के गगनभेदी उद्घोष के बीच श्रद्धालु चांदी और पीतल के कलश कंधों पर रखकर आगे बढ़ते रहे।
यात्रा में युवाओं, बुजुर्गों और बच्चों की बड़ी संख्या ने भागीदारी की। पारंपरिक साफा, आकर्षक परिधान, नक्काशीदार गगरियां और कंधों पर सजे कलश श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने। बालक भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप में नजर आए, जिससे यात्रा का धार्मिक और सांस्कृतिक स्वरूप देखते ही बन रहा था।
—परंपरागत मार्ग से होते हुए विश्वनाथ धाम पहुंची यात्रा
शोभायात्रा परंपरागत मार्ग से बाबा तिलभाण्डेश्वर, शीतला माता, आल्हादेश्वर महादेव और ढुंढीराज गणेश के दर्शन करती हुई श्री काशी विश्वनाथ धाम पहुंची। गंगा द्वार से प्रवेश करने के बाद श्रद्धालुओं ने पश्चिमी द्वार के माध्यम से मंदिर परिसर में प्रवेश किया।
इस वर्ष भी मंदिर प्रशासन की ओर से केवल 21 यादव श्रद्धालुओं को ही गर्भगृह में प्रवेश कर बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक करने की अनुमति मिली। अन्य हजारों श्रद्धालुओं ने गर्भगृह के बाहर से ही जल अर्पित कर दर्शन-पूजन किया।
—10 शिवालयों में जलाभिषेक कर हुआ यात्रा का समापन
विश्वनाथ धाम से निकलने के बाद श्रद्धालुओं ने दारानगर स्थित महामृत्युंजय महादेव, त्रिलोचन महादेव, ओम कालेश्वर महादेव तथा लाटभैरव सहित कुल 10 प्रमुख शिवालयों में जलाभिषेक किया। लगभग ढाई घंटे में 11 किलोमीटर की यात्रा पूरी कर धार्मिक आयोजन का समापन हुआ।
—जगह-जगह हुआ स्वागत, पुष्पवर्षा और फलाहार वितरण
पूरे यात्रा मार्ग में श्रद्धालुओं का भव्य स्वागत किया गया। विभिन्न स्थानों पर शोभायात्रा पर पुष्पवर्षा की गई, ध्वज की पूजा और आरती उतारी गई। समाज के लोगों ने प्रसाद एवं फलाहार का वितरण भी किया। लाटभैरव मंदिर पर समिति के सदस्य विनोद पहलवान ने फलाहार की व्यवस्था की। मैदागिन में स्वर्गीय गोपाल बाबा की स्मृति में ध्वज पूजन एवं फलाहार वितरण किया गया। महामृत्युंजय महादेव के निकट हीरा बाबा मंदिर पर भी श्रद्धालुओं के लिए फलाहार की व्यवस्था रही। दूधकटरा पर पहलवान भईयालाल यादव एवं उनकी टीम ने साफा पहनाकर और लस्सी पिलाकर यात्रियों का स्वागत किया, जबकि त्रिलोचन महादेव मंदिर परिसर में अनिल यादव, गोलू सरदार और महेश यादव ने फलाहार वितरित किया।
—1932 में भीषण अकाल के दौरान शुरू हुई थी परंपरा
चंद्रवंशी गोप सेवा समिति के प्रदेश अध्यक्ष लालजी यादव ने बताया कि इस जलाभिषेक यात्रा की शुरुआत वर्ष 1932 में भीषण अकाल के समय हुई थी। उस समय शीतला गली के भोला सरदार, कृष्णा सरदार, बच्चा सरदार तथा ब्रह्मनाल के चुन्नी सरदार और रामजी सरदार ने संकल्प लिया था कि यदि बाबा विश्वनाथ के जलाभिषेक के बाद वर्षा होगी तो अगले वर्ष से पूरा यदुवंशी समाज सावन के प्रथम सोमवार को सामूहिक जलाभिषेक करेगा। पांचों शिवभक्त यदुवंशियों ने गौरी केदारेश्वर से लाटभैरव तक बाब विश्वनाथ मंदिर सहित सात शिवालयों, भैरव मंदिर और एक शक्तिपीठ में जलाभिषेक किया। इसके बाद अच्छी वर्षा हुई और तभी से यह परंपरा निरंतर चली आ रही है। कोरोना महामारी के दौरान भी समाज ने सांकेतिक रूप से इस परंपरा का निर्वहन किया था।
—समिति के नेतृत्व में निकली शोभायात्रा
चंद्रवंशी गोप सेवा समिति के अध्यक्ष लालजी यादव के नेतृत्व में निकली इस भव्य शोभायात्रा के सफल आयोजन में समिति के पदाधिकारियों और समाज के हजारों लोगों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। समिति के आयुष्मान चंद्रवंशी ने बताया कि इस वर्ष लगभग 40 हजार से अधिक यदुवंशियों ने विश्व शांति एवं जनकल्याण की कामना के साथ बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक किया।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी