कभी हल्की धूप तो कभी फुहार और रिमझिम बारिश से मौसम में तरावट,हथिया नक्षत्र का प्रभाव

 


- बंगाल की खाड़ी में बने निम्नदबाव से बारिश,खरीफ की फसल के लिए बारिश सोना

वाराणसी, 24 सितंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी काशी समेत आसपास के जिलों में एक बार फिर मौसम का मिजाज बदल गया है। बुधवार शाम से शुरू हुई बारिश देर रात तक कभी तेज तो कभी रिमझिम होती रही। गुरुवार सुबह भी मौसम का यही रुख बना रहा। कभी हल्की धूप निकली तो कुछ देर बाद फुहारें पड़ने लगीं। बारिश के चलते वातावरण से उमस गायब हो गई और लोगों को सुबह के समय हल्की ठंडक का भी अहसास हुआ।

मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव क्षेत्र के प्रभाव से वाराणसी और आसपास के इलाकों में बारिश का दौर शुरू हुआ है। बुधवार शाम हुई झमाझम बारिश के बाद पूरी रात रुक-रुककर बारिश होती रही। इसके चलते तापमान में भी करीब छह डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई।

गुरुवार सुबह 11 बजे वाराणसी में अधिकतम तापमान 26 डिग्री और न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इस दौरान आर्द्रता 90 प्रतिशत रही, जबकि हवा की गति करीब 21 किलोमीटर प्रति घंटा रही। बारिश और बादलों के कारण दृश्यता में भी कमी दर्ज की गई।इस बीच मौसम विभाग ने शुक्रवार तक येलो अलर्ट जारी करते हुए गरज-चमक के साथ भारी बारिश की संभावना जताई है। इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का भी अनुमान है।

धान समेत खरीफ की फसलों के लिए बारिश फायदेमंद

शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक हो रही बारिश को खरीफ की फसलों, खासकर धान के लिए बेहद लाभकारी माना जा रहा है। किसानों के लिए इस समय हुई बारिश फसल की जरूरत के लिहाज से महत्वपूर्ण बताई जा रही है। बारिश से खेतों में नमी बढ़ी है, जिससे धान की फसल को फायदा मिलने की उम्मीद है। हालांकि, लगातार बारिश से शहर की गलियों और निचले इलाकों में जगह-जगह कीचड़ और हल्का जलभराव भी देखने को मिला। ग्रामीण क्षेत्रों में भी कुछ स्थानों पर बारिश के कारण आवागमन प्रभावित हुआ।

हथिया नक्षत्र से जोड़ा जा रहा बारिश का दौर

सितंबर माह के अंतिम दौर में हो रही इस बारिश को स्थानीय स्तर पर हथिया नक्षत्र से भी जोड़कर देखा जा रहा है। इस दौरान कहीं हल्की, कहीं मध्यम तो कहीं तेज बारिश हो रही है। पिछले कई दिनों से उमस और गर्मी से परेशान लोगों को बारिश के कारण राहत मिली है।

लोकमान्यता में हथिया नक्षत्र और बारिश को लेकर महाकवि घाघ की कहावत भी प्रचलित है- ‘हथिया पुरवाई पावै, लौट चौमास लगावै।’ इन दिनों पुरवाई हवा चलने के साथ बारिश का दौर भी बना हुआ है। पंचांगों के अनुसार, वर्ष 2026 में सूर्य का हस्त (हथिया) नक्षत्र में प्रवेश 27 सितंबर 2026 को दोपहर 1 बजकर 25 मिनट पर होगा। सूर्य का हस्त नक्षत्र में यह प्रवास 10 अक्टूबर 2026 की रात 02 बजकर 24 मिनट तक रहेगा, जिसके बाद सूर्य चित्रा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। मानसून की विदाई के दौर के बीच हो रही बारिश से जहां लोगों को उमस और गर्मी से राहत मिली है, वहीं किसानों को धान समेत खरीफ की फसलों के लिए भी इससे लाभ मिलने की उम्मीद है।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी