निर्जला एकादशी पर आरपी घाट से निकली श्री काशी विश्वनाथ की वार्षिक कलश यात्रा

 




कलश यात्रा में झेलम, चिनाव, रावी, गोदावरी, व्यास के अलावा काशी, हरिद्वार और ऋषिकेश के गंगाजल से पूरित 11 रजत कलश लेकर शामिल हुए श्रद्धालु

वाराणसी, 25 जून (हि.स.)। ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी (निर्जला एकादशी)पर गुरूवार को उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी के राजेन्द्र प्रसाद घाट से श्री काशी विश्वनाथ की वार्षिक कलश यात्रा निकाली गई। झेलम, चिनाव, रावी, गोदावरी, व्यास सहित काशी, हरिद्वार और ऋषिकेश के गंगाजल से पूरित 11 रजत कलश लेकर श्रद्धालु यात्रा में शामिल हुए।

घाट से गंगाजल लेकर हर-हर महादेव के उद्घोष करते हुए श्रद्धालु श्री काशी विश्वनाथ धाम मे पहुंचे। इस दौरान पूरे रास्तेे जगह-जगह लोगों ने यात्रा का स्वागत किया। कई जगह यात्रा में शामिल लोगों पर पुष्पवर्षा हुई। वहीं, सामाजिक संस्थाओं के कार्यकर्ताओं ने शीतल जल, शर्बत, अमरस आदि का पान भी कराया।

बाबा विश्वनाथ के इस वार्षिक कलश यात्रा में पीएसी बैंड, नंदी पर सवार शिव पार्वती बने कलाकार, शंखवादकों, डमरू दल, पीली साड़ी पहने माथे पर मिट्टी का कलश लिए महिलाएं आकर्षण का केन्द्र रहीं। श्री काशी विश्वनाथ धाम पहुंची कलश यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं ने 1008 कलशों में पवित्र नदियों का जल भरकर बाबा विश्वनाथ के पावन ज्योर्तिलिंग का जलाभिषेक किया।

सुप्रभातम व श्रीकाशी मोक्षदायिनी सेवा समिति के तत्वावधान में कार्यक्रम संयोजक निधि देव अग्रवाल, पवन चौधरी, दिलीप सिंह के नेतृत्व में कलश यात्रा निकलने के पूर्व वैदिक मंचोंच्चार के बीच ब्राह्मणों ने राजेन्द्र प्रसाद घाट पर कलश पूजन कराया। विशिष्टजनों ने देश की विभिन्न पवित्र नदियों के जल से भरे 11 रजत कलश अपने सिर पर धारण किए तो अन्य लोगों ने दूध, बेलपत्र माला से पूरित 1008 कलशों को सिर पर रखा। मां गंगा की आरती कर सभी बाबा विश्वनाथ धाम की ओर चल पड़े। दशाश्वमेध, गोदौलिया, हौज कटोरा, बांस फाटक होते हुए ज्ञानवापी के रास्ते यात्रा में शामिल लोग धाम में पहुंचे और बाबा का अभिषेक कर राष्ट्र कल्याण की कामना की।

यात्रा में श्रीकाशी-कांची कामकोटि मठ के प्रबंधक वी. सुब्रमण्यम मणि, हिन्दू युवा वाहिनी के अंबरीश सिंह भोला, मारवाड़ी समाज, श्रीश्याम मंडल, बालसखा श्रीबाल श्याम मंडल, माहेश्वरी समाज मंडल, खत्री हितकारिणी सभा, केसरवानी वैश्य समाज के लोग शामिल रहे।

कार्यक्रम संयोजक निधि देव अग्रवाल ने बताया कि यह परंपरा शंकराचार्य जी की प्रेरणा से वर्ष 1999 से शुरू हुई थी। राजकिशोर गुप्ता बचानू साव,जगदंबा तुलस्यान अब स्मृतिशेष ने इस यात्रा को भव्य रूवरूप दिया था।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी