बहरीन में भारतीय योग का योगाचार्य रितेश ने डंका बजाया, फ्रांस, चीन में भी योग साधकों को दिया प्रशिक्षण

 


वाराणसी, 20 मई (हि.स.)। धर्म नगरी काशी के योगाचार्य रितेश दुबे खाड़ी के देशों में भी भारतीय योग का डंका बजा रहे हैं। योगाचार्य रितेश पिछले डेढ़ वर्ष से खाड़ी देशों में भारतीय योग परम्परा, संस्कृत भाषा एवं भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार में लगे हुए हैं। वर्ष 2025 के प्रारम्भ में योगी रितेश ने अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर योग के प्रचार के लिए बहरीन में पारम्परिक योग का प्रशिक्षण दिया। वर्तमान में वे फ्रांस, चीन सहित विभिन्न देशों के योग साधकों को पारम्परिक योग, प्राणायाम एवं भारतीय आध्यात्मिक संस्कृति का प्रशिक्षण दे रहे हैं।

काशी आए योगाचार्य रितेश ने बताया कि बहरीन देश में सर्वप्रथम नवभारत इण्टरनेशनल संस्थान में योग प्रशिक्षक के रूप में अपनी सेवाएँ प्रदान की। यहां विभिन्न आयु वर्ग के लोगों को योग, प्राणायाम, संस्कृत एवं भारतीय जीवनशैली से जोड़ने का कार्य किया। योगी रितेश ने कहा कि मेरा उद्देश्य योग, संस्कृत एवं भारतीय संस्कृति के माध्यम से सम्पूर्ण विश्व को स्वास्थ्य, संस्कार, संतुलन एवं आध्यात्मिक जीवन मूल्यों से जोड़ना है। उन्होंने बताया कि भारत रत्न महामना पं. मदन मोहन मालवीय की जन्मस्थली प्रयागराज में मेरा जन्म हुआ। 15 वर्ष की आयु में मथुरा वृन्दावन से अपनी योग यात्रा का प्रारम्भ किया। वर्ष 2015 में काशी आगमन के पश्चात् यहां के योग आचार्यों का सान्निध्य प्राप्त हुआ, जिसने उनकी साधना एवं आध्यात्मिक जीवन को नई दिशा प्रदान की। शुरूआत में काशी के दुर्गाकुंड स्थित धर्म संघ शिक्षा मण्डल में रहकर सेवा-सुश्रूषा के साथ संस्कृत की पूर्व मध्यमा परीक्षाओं का स्वाध्याय किया। बचपन से ही योग एवं अध्यात्म के प्रति विशेष रुचि रही। काशी के शास्त्रार्थ महारथी वाचस्पति डॉ. दिव्यचेतन ब्रह्मचारी का आशीर्वाद प्राप्त हुआ। उनके मार्गदर्शन तथा अन्तरराष्ट्रीय योग गुरु डॉ. राकेश पाण्डेय के निर्देशन में हठयोग की पारम्परिक क्रियाओं का गहन अभ्यास किया। इसके बाद स्वामी नारायणानन्दतीर्थ वेद विद्यालय में निःशुल्क योग प्रशिक्षण देकर समाज सेवा का कार्य प्रारम्भ किया। तत्पश्चात् काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वसन्त कन्या महाविद्यालय, विक्रम विश्वविद्यालय तथा राजस्थान आदि प्रदेशों के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं शिक्षण संस्थानों में योग प्रशिक्षण, कार्यशालाओं और व्याख्यानों के माध्यम से पारम्परिक योग का व्यापक प्रचार-प्रसार किया।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी