वासंतिक चैत्र नवरात्र : धर्म नगरी काशी में आदिशक्ति के गौरी स्वरूप का पूजन, शुरूआत मुख्य निर्मालिका गौरी के दर्शन से
—इस बार माता रानी का आगमन पालकी से, मान्यता है कि इन्हीं नौ दिन में सृष्टि का सृजन
वाराणसी, 17 मार्च (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी (काशी) में आदिशक्ति की आराधना के महापर्व वासंतिक चैत्र नवरात्र को लेकर सनातनी श्रद्धालुओं में अभी से आस्था और उल्लास दिखने लगा है। सनातनी घरों से लेकर देवी मंदिरों में महापर्व की तैयारियां साफ सफाई, सजावट का कार्य अन्तिम दौर में है।
शक्ति आराधना के महापर्व की शुरूआत 19 मार्च से हो रही है। धर्म नगरी में चैत्र नवरात्र में आदिशक्ति के गौरी स्वरूप के पूजन का विधान है। महापर्व के नौ दिनों में श्रद्धालु गौरी स्वरूप के साथ नवदुर्गा के विविध स्वरूप के दरबार में हाजिरी लगाते हैं। शुरूआत पहले दिन गायघाट स्थित मुखनिर्मालिका गौरी और अलईपुर स्थित मां शैलपुत्री के दरबार में दर्शन पूजन से होती है। युवा ज्योतिषविद आचार्य रविन्द्र तिवारी बताते हैं कि इस बार चैत्र नवरात्र 19 मार्च से शुरू हो रहा है। सुबह 6.52 बजे से प्रतिपदा तिथि शुरू हो रही है। ऐसे में कलश स्थापना का शुभ समय सुबह 6.52 बजे से 7.53 बजे तक रहेगा। इसके बाद अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12.5 बजे 12.53 बजे के बीच है। इस समय भी श्रद्धालु कलश स्थापना कर सकते हैं। चैत्र नवरात्र 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक चलेगा। ऐसे में चैत्र नवरात्र पूरे नौ दिनों की होगी।
रविन्द्र तिवारी बताते हैं कि इस बार आदिशक्ति का आगमन पालकी से हो रहा है। माता का पालकी से आना संघर्ष और अस्थिरता का संकेत है। वहीं, माता का प्रस्थान गज (हाथी) पर माना जा रहा है। गज (हाथी) पर प्रस्थान देश की समृद्धि, स्थिरता और सुख का प्रतीक माना जाता है। देवी महापुराण में लिखा गया है कि अगर नवरात्र का आरंभ रविवार या सोमवार को होता है तब माता का वाहन हाथी होता है। शनिवार और मंगलवार के दिन जब भी मां जगदम्बा आगमन करती हैं तब माता का वाहन घोड़ा होता है। गुरुवार और शुक्रवार से नवरात्र का आरंभ होने से मां दुर्गा का आगमन डोली (पालकी) से होता है। बुधवार के दिन नवरात्र का आरंभ जब होता है तो मां दुर्गा का आगमन नाव पर होता है।
वाराणसी में नाै गौरी मंदिर
—मुखनिर्मालिका गौरी गाय घाट स्थित हनुमानजी मंदिर
—ज्येष्ठा गौरी मैदागिन के निकट सप्त सागर मोहल्ले में
—सौभाग्य गौरी विश्वनाथ मंदिर में स्थित
—ज्ञानवापी मस्जिद के पीछे स्थित श्रृंगार गौरी
—विशालाक्षी गौरी मीर घाट पर स्थित
—ललिता गौरी ललिता घाट पर
—भवानी गौरी, अन्नपूर्णा देवी के परिसर से सटे राम मंदिर में
—मंगला गौरी पंचगंगा घाट
—महालक्ष्मी गौरी लक्ष्मी कुंड
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी